महाराष्ट्र की राजनीति में उठापटक और दलों में टूट का सिलसिला लगातार जारी है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों में टूट के बाद अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) भी इसी राह पर चलती दिख रही है। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है, जहां राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं।
वहीं ताजा जानकारी के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों ने अलग गुट बना लिया है। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की है और उन्हें एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के संबंध में एक पत्र भी सौंपा है। इस कदम को उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे पार्टी के भीतर बढ़ती दूरी साफ दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, इन छह सांसदों ने अपने राजनीतिक भविष्य को देखते हुए यह फैसला लिया है और यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने भी पार्टी का साथ छोड़ दिया
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने भी पार्टी का साथ छोड़ दिया था। इस तरह की टूट भारतीय राजनीति में नई बात नहीं है, लेकिन एक के बाद एक दो बड़े क्षेत्रीय दलों में सांसदों का इस तरह अलग होना राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक हलचल बढ़ा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है और कई दलों के समीकरण बदल सकते हैं।
असदुद्दीन ओवैसी ने साधा निशाना
इस राजनीतिक उठापटक और दलों में टूट के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरे मामले पर तंज कसते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निशाने पर लिया। ओवैसी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लिखा, “शिकारी नया है, जाल पुराना है।” यह टिप्पणी उन राजनीतिक तरीकों की ओर इशारा करती है, जिनके जरिए अक्सर विपक्षी दलों के नेताओं को अपनी ओर लाने की कोशिश की जाती है।
ओवैसी ने आगे कहा कि उद्धव बाला साहेब ठाकरे के कुछ सांसद भी भाजपा में शामिल होने का सोच रहे हैं। उन्होंने तंज करते हुए सवाल उठाया कि शायद हमें उन दो ‘बड़े’ सांसदों से पूछना चाहिए कि किन लोगों ने इन सांसदों को भाजपा में शामिल होने के लिए ‘धमकाया’ है। ओवैसी ने यह भी पूछा कि बाकी 19 टीएमसी सांसदों ने पार्टी क्यों छोड़ी। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि शायद किसी पर आरोप लगाने में एक महीना लग जाए। कुरान का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा, “हर चुगलखोर और बुराई करने वाले के लिए बर्बादी है।” यह टिप्पणी उन लोगों पर निशाना मानी जा रही है, जो कथित तौर पर इन राजनीतिक घटनाओं में शामिल हैं।
भाजपा में शामिल होना इतना आसान क्यों: असदुद्दीन ओवैसी
एआईएमआईएम प्रमुख ने भाजपा पर सीधे सवाल उठाते हुए पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का भाजपा में शामिल होना इतना आसान क्यों है। उन्होंने हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर ये सभी लोग क्यों जा रहे हैं। ओवैसी ने कहा कि आप अपनी सभी नाकामियों के लिए किसी एक ‘बड़े सांसद’ को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। उन्होंने एक बार फिर अपनी बात दोहराई, “शिकारी नया है, जाल पुराना है।” उनका कहना था कि यह सब एक तय रणनीति का हिस्सा लगता है।
जिन छह सांसदों ने उद्धव ठाकरे गुट से अलग होकर नया रास्ता चुना है, उनमें शिर्डी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे, हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर, मुंबई नॉर्थ-ईस्ट से सांसद संजय दीना पाटिल, परभणी से सांसद संजय हरिभाऊ जाधव, उस्मानाबाद से सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर और यवतमाल से सांसद संजय देशमुख शामिल हैं। इन सांसदों का यह सामूहिक फैसला उद्धव गुट के लिए निश्चित रूप से बड़ी चुनौती बन सकता है और महाराष्ट्र में राजनीतिक ताकत के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।






