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उपराष्ट्रपति चुनाव पर बड़ा दावा, नतीजों के बाद क्रॉस वोटिंग पर सियासी हलचल

Written by:Neha Sharma
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उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजे 9 सितंबर को आए थे और शुक्रवार (12 सितंबर) को एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने शपथ ले ली। हालांकि, इस जीत से ज्यादा सुर्खियां अब क्रॉस वोटिंग को लेकर लग रही हैं।
उपराष्ट्रपति चुनाव पर बड़ा दावा, नतीजों के बाद क्रॉस वोटिंग पर सियासी हलचल

उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजे 9 सितंबर को आए थे और शुक्रवार (12 सितंबर) को एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने शपथ ले ली। हालांकि, इस जीत से ज्यादा सुर्खियां अब क्रॉस वोटिंग को लेकर लग रही हैं। दावा किया जा रहा है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया के कई सांसदों ने एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया। यही वजह रही कि नतीजों में अंतर उम्मीद से ज्यादा निकला।

महाराष्ट्र में बीजेपी नेता और मंत्री आशीष शेलार के बयान ने इस विवाद को और गहरा दिया। उन्होंने कहा कि वे उप मुख्यमंत्री अजित पवार का धन्यवाद करना चाहते हैं क्योंकि उनकी मदद से एनडीए को लोकसभा और राज्यसभा में वास्तविक संख्या से ज्यादा वोट मिले। शेलार ने हालांकि इससे ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन इस बयान के बाद सवाल उठने लगे कि क्या अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की एनसीपी (एसपी) के सांसदों को अपने पक्ष में झुका लिया था।

क्रॉस वोटिंग पर सियासी हलचल

इन अटकलों को बल इसलिए भी मिल रहा है क्योंकि एनसीपी के राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल ने चुनाव के दिन ही संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि विपक्षी खेमे के कई सांसदों को लग रहा है कि चुनाव लड़ने का कोई फायदा नहीं है और वे भी सीपी राधाकृष्णन को वोट देंगे। इसके बाद शिवसेना शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने भी दावा किया था कि शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार गुट के सांसदों ने एनडीए उम्मीदवार का साथ दिया।

आंकड़ों से भी इन दावों को बल मिलता है। एनडीए को कुल 422 सांसदों का समर्थन हासिल था, लेकिन राधाकृष्णन को 452 वोट मिले। वहीं इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 320 वोट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें केवल 300 वोट ही मिले। इस दौरान 15 वोट अवैध घोषित हुए, जिन पर जानबूझकर ऐसा करने का आरोप है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्रॉस वोटिंग करने वाले सांसद आखिर कौन थे।