वर्धा जिले की छह विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर एरर सामने आए हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय समन्वयक और प्रदेश कार्यकारी मंडल के प्रतिनिधि शैलेश अग्रवाल ने स्थानीय कांग्रेस द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि कई जगह एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग ईपिक नंबर के साथ दर्ज है। इतना ही नहीं, पुणे, नागपुर और अन्य शहरों में स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके नागरिकों के नाम भी अभी तक जिले की मतदाता सूची में शामिल हैं। अग्रवाल ने कहा कि यह स्थिति चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
वर्धा जिले की मतदाता लिस्ट में गड़बड़ियां?
अग्रवाल ने बताया कि कांग्रेस पार्टी की ओर से मतदाता सूची की जांच शुरू की गई है और अभी तक केवल 20 प्रतिशत सूची की ही जांच पूरी हुई है। शुरुआती जांच में ही गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, हिंगणघाट शहर की मतदाता सूची में दूसरे राज्यों से आए मज़दूरों के नाम शामिल हैं। उन्होंने आशंका जताई कि ये मज़दूर यहां और अपने गृहनगर दोनों जगह मतदान कर चुके हो सकते हैं। इसी तरह, देवली, पुलगांव और हिंगणघाट के 187 नागरिकों के नाम ग्राम पंचायत और नगरपालिका दोनों की सूचियों में दर्ज हैं। अलग-अलग चुनाव होने के कारण इन लोगों ने दोनों जगह वोट डाला होगा, जिससे यह ‘वोट चोरी’ का मामला बनता है।
अग्रवाल ने यह भी कहा कि एक ही नाम के बावजूद अलग-अलग ईपिक नंबर वाले मतदाताओं की संख्या 4,765 है। वहीं, ग्रामपंचायत और नगरपालिका दोनों जगह नाम दर्ज होने वाले मतदाताओं की संख्या 8,049 बताई जा रही है। इतना ही नहीं, वर्धा से पुणे, नागपुर और अन्य जगह स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके 16,380 नागरिकों के नाम जिले की सूची में कायम हैं। इसके अलावा, देवली, पुलगांव, आर्वी और हिंगणघाट की मतदाता सूची में दर्ज 4,950 नागरिकों के नाम वर्धा शहर की सूची में भी शामिल पाए गए हैं।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक ही नागरिक का नाम दो जगह मौजूद है, तो चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उन्होंने दोहरी वोटिंग की है या नहीं। इसके लिए मतदाता सूची को डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध कराया जाए और मतदान केंद्रों का सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किया जाए। अग्रवाल ने चुनाव आयोग से मांग की कि इस मुद्दे की गंभीरता से जांच की जाए ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव की विश्वसनीयता पर कोई आंच न आए।





