पूर्व विधायक समर्थकों के साथ पहुंचे उपार्जन केंद्र, लॉकडाउन का खुलेआम उल्लंघन

पूर्व विधायक समर्थकों के साथ पहुंचे उपार्जन केंद्र, लॉकडाउन का खुलेआम उल्लंघन

मंदसौर/तरूण राठौड़

मन्दसौर में भी लोकडाउन कर्फ्यू चल रहा है। साथ ही सुवासरा विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सरगर्मी शुरू हो गई है। इसी के चलते पूर्व विधायक सहित हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए विधायक जनसेवा के बहाने अपनी टिकट को कन्फर्म करने के लिए लॉकडाउन को तोड़ रहे हैं। यही नहीं, ये नेता अपने 10 से 20 समर्थकों को साथ में लेकर घूम रहे है। जहां प्रशासन हरसंभव कोशिश कर इस महामारी से निपटने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में ये नेता उपचुनाव के चलते सारी कोशिशों पर पानी फेरने से बाज नही आ रहे।

ऐसा ही एक वाकया शनिवार को सुवासरा विधानसभा सीट पर देखने को मिला जब पूर्व विधायक राधेश्याम पाटीदार अपने 20 समर्थकों के साथ मास्क बांटने उपार्जन केंद्र जा पहुंचे। वहां पर उन्होंने मास्क तो बांटे लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग की खूब धज्जियां उड़ाई। यही नहीं, समर्थकों सहित वहां मौजूद किसानों के साथ खूब फोटो भी खिंचाए जिसमें ये सभी बेहद पास पास खड़े हैं। एक दिन पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए हरदीप सिंह डंग ने भी इनकी तरह किसानों को इकठ्ठा कर लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाई थी। इस तरह साफ दिख रहा है कि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते ये नेता खुद तो नियमों का उल्लंघन कर ही रहे हैं, दूसरों की जान भी खतरे में डाल रहे हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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