मध्य प्रदेश की धरती पर भगवान शिव के अनेक प्राचीन और चमत्कारी मंदिर हैं, लेकिन मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर अपनी अनोखी पहचान के कारण अलग ही जगह रखता है। यहां स्थित अष्टमुखी शिवलिंग को देखकर हर श्रद्धालु आश्चर्य और भक्ति से भर जाता है। हाल ही में बने पशुपतिनाथ लोक ने इस तीर्थ की भव्यता को और बढ़ा दिया है।
महाशिवरात्रि और सावन से पहले यहां भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी है। 11 फीट ऊंचा शिवलिंग, लाल पत्थर पर उकेरे गए आठ मुख और 22 फीट ऊंचा त्रिनेत्र इस जगह को आध्यात्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बना रहे हैं। यहां आने वाला हर व्यक्ति इसे जीवन का यादगार अनुभव बताता है।
अष्टमुखी शिवलिंग
मंदसौर के शिवना नदी किनारे स्थित पशुपतिनाथ मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां का अष्टमुखी शिवलिंग है। यह शिवलिंग एक ही लाल पत्थर से बना है और इसमें भगवान शिव के आठ मुख उकेरे गए हैं।
इस शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 7.25 फीट है, लेकिन घुमावदार संरचना के कारण इसकी कुल ऊंचाई 11 फीट से अधिक प्रतीत होती है। शिवलिंग के ऊपर चार मुख और नीचे चार मुख बने हैं, जो जीवन की विभिन्न अवस्थाओं और शिव के अलग-अलग स्वरूपों का प्रतीक माने जाते हैं।
आठ मुखों के नाम शर्व, भाव, रुद्र, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव बताए जाते हैं। इनमें से पश्चिम दिशा की ओर बना मुख उग्र रूप का प्रतीक है, जो शिव के संहारक स्वरूप को दर्शाता है। मंदिर के चारों ओर चार द्वार बने हैं, जो यह दर्शाते हैं कि भगवान के दरबार के दरवाजे सभी के लिए हमेशा खुले हैं।
शिवना नदी से प्रकट हुआ था शिवलिंग
स्थानीय लोगों के अनुसार, सदियों पहले शिवना नदी में एक बड़ा पत्थर पड़ा रहता था और लोग उसी पर कपड़े धोते थे। किसी को पता नहीं था कि यह पत्थर भगवान शिव का स्वरूप है।
किंवदंती के अनुसार, एक रात किसी ग्रामीण को सपने में भगवान शिव ने दर्शन देकर बताया कि नदी में पड़ा पत्थर उनका अष्टमुखी स्वरूप है और उसे बाहर निकालकर स्थापित किया जाए।
जब पानी कम हुआ तो पत्थर को निकालने की कोशिश हुई, लेकिन वह इतना भारी था कि कई बैलों की मदद के बाद भी उसे हिलाना मुश्किल हो गया। बाद में जैसे-तैसे उसे बाहर निकाला गया, पर जहां उसे स्थापित करने की कोशिश की गई, वहां वह हिला ही नहीं।
25 करोड़ से बदली मंदिर परिसर की तस्वीर
हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने यहां 25 करोड़ रुपये की लागत से पशुपतिनाथ लोक का निर्माण कराया है, जिसका लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। अब मंदिर परिसर पहले से कहीं अधिक भव्य और सुविधाजनक हो गया है। यहां श्रद्धालुओं के लिए चौड़े पाथवे, उद्यान, म्यूरल वॉल, शिव-लीलाओं की झांकियां, सत्संग भवन और बैठने की जगह बनाई गई है। परिसर में एक ओपन एयर थियेटर भी बनाया गया है, जहां धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। आपातकालीन स्थितियों के लिए प्राथमिक चिकित्सा कक्ष भी बनाया गया है। इस विकास के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पर्यटन और व्यापार दोनों को फायदा मिलेगा।
22 फीट ऊंचा त्रिनेत्र बना नई पहचान
पशुपतिनाथ लोक में स्थापित 22 फीट ऊंचा शिव त्रिनेत्र इस परिसर का नया आकर्षण बन गया है। इसके बीच में लगा विशाल रुद्राक्ष शिव के दिव्य स्वरूप का आभास कराता है। शाम के समय जब यहां रोशनी होती है, तो यह दृश्य अत्यंत मनमोहक लगता है। श्रद्धालु यहां फोटो खिंचवाते हैं और इसे अपनी यात्रा का सबसे खास अनुभव बताते हैं। यह त्रिनेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जा रहा है और आने वाले समय में यह जगह धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकती है।
त्योहारों पर उमड़ता है आस्था का सागर
महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में दिन-रात पूजा-अर्चना और अभिषेक चलता रहता है। भक्तों का मानना है कि यहां अष्टमुखी शिवलिंग का जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। कई लोग यहां हर साल दर्शन के लिए आते हैं और इसे अपनी आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
स्थानीय लोगों और पर्यटन को मिल रहा लाभ
पशुपतिनाथ लोक के बनने के बाद मंदसौर शहर में पर्यटन गतिविधियां बढ़ी हैं। होटल, दुकानों और स्थानीय व्यापार को भी इसका सीधा फायदा मिल रहा है। युवा अब यहां गाइड और अन्य सेवाओं के जरिए रोजगार भी पा रहे हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह स्थान उज्जैन और ओंकारेश्वर की तरह बड़ा तीर्थ केंद्र बन सकता है।





