छोड़ फाड़ : दिवाली पर परंपरा निभाने में फंस गए मंत्रीजी!

छोड़ फाड़ : दिवाली पर परंपरा निभाने में फंस गए मंत्रीजी!

मंदसौर, तरुण राठौर| जिले की सुवासरा विधानसभा क्षेत्र से नवनिर्वाचित विधायक और मंत्री हरदीप सिंह डंग (Hardeep Singh Dang) दिवाली के बाद मनाये जाने वाले पारम्परिक खेल ‘छोड़ फाड़’ के आयोजन में शामिल होकर फंस गए| कांग्रेस (Congress) ने इसे पशु क्रूरता का मामला बताकर मंत्री से माफ़ी की मांग की है| कांग्रेस नेता राघवेंद्र तोमर (Raghvendra Tomar) ने गौ संवर्धन आयोग से इसकी शिकायत की है| वहीं बीजेपी विधायक यशपाल सिसोदिया (Yashpal Sisodiya) ने भी इस मामले में नाराजगी जाहिर की है|

दरअसल, क्षेत्र में सालों पुरानी परंपरा के तहत दिवाली के मौके पर गोवर्धन पूजा के बाद ‘छोड़ फाड़’ का आयोजन किया जाता है| इसमें गायों को एक चमड़े लगे चिमटे के साथ उकसाया जाता है ताकि वह उस पर लपके और उसके टुकड़े कर दे | कई गाये इकट्ठी कर ये पर्तिस्पर्धा करवाई जाती है जिसमे पुरे गाँव की गायो को इकट्ठा किया जाता है| इस आयोजन में मंत्री हरदीप सिंह डंग भी शामिल हुए| उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर हो गया| वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई है|

कांग्रेस नेता राघवेंद्र तोमर ने मामले की शिकायत गौ संवर्धन आयोग से की है| साथ ही सीएम से पूरे मामले का संज्ञान में लेने की मांग की है| उन्होंने कहा कि इस मामले में मंत्री हरदीप सिंह खुद सामने आकर बयान दें और माफ़ी मांगे| इधर, बीजेपी विधायक यशपाल सिसोदिया ने भी मंत्री के ऐसे आयोजन में शामिल होने पर नाराजगी व्यक्त की है| उन्होंने स्थानीय प्रशासन से ऐसे आयोजन पर रोक लगाने की मांग की है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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