मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर भक्तों के बीच बहुत प्रसिद्ध है। यहां स्थानीय लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं की भी भीड़ देखने को मिलती है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए भक्तों की संख्या में इजाफा होने की भी उम्मीद है।
इसी को लेकर कलेक्टर दिव्यांक सिंह की अध्यक्षता में मंदिर प्रबंध समिति की बैठक का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर के सभागार में हुई इस बैठक में मंदिर समिति के पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मंदिर के विकास पर चर्चा
इस बैठक के दौरान मंदिर से जुड़े विकास कार्यों पर चर्चा की गई। ये तय किया गया है कि मंदिर से जुड़े सभी विकास कार्यों को प्लान A, प्लान B और प्लान C के तहत प्राथमिकता के आधार पर बांटकर पूरा किया जाएगा। इसके लिए मास्टर प्लान बनाने पर भी जोर दिया गया है ताकि काम तय समय में सही तरह से पूरे हो सकें।
पुजारियों का वेतन और संख्या
बैठक के दौरान मंदिर में पुजारियों की संख्या बढ़ाने से लेकर वर्षों से पशुपतिनाथ महादेव की सेवा कर रहे पुजारियों का वेतन बढ़ाने पर भी चर्चा हुई है। वहीं प्रतिमा का क्षरण कम हो इसलिए अभिषेक में आरओ जल का इस्तेमाल करने पर भी विचार विमर्श किया गया है।
बैठक के दौरान सांसद श्री सुधीर गुप्ता, मंदसौर विधायक श्री विपिन जैन, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी गुर्जर, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री बसंत शर्मा, संबंधित अधिकारी एवं श्री पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य मौजुद रहे। pic.twitter.com/Cay44RX8eQ
— PRO JS Mandsaur (@PROJSMandsaur) September 9, 2026
इन सुविधाओं पर चर्चा
सिंहस्थ में अधिक श्रद्धालु पशुपतिनाथ दर्शन के लिए आ सकते हैं। ऐसे में उनकी सुविधा को देखते हुए भक्त निवास बनाने पर जोर दिया गया। इसके लिए जमीन खरीदने और उपलब्ध जमीनों को बढ़ाने जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई। ये भी तय किया गया कि मंदिर की एक ऑनलाइन वेबसाइट तैयार की जाए। ऑनलाइन सुविधाएं बढ़ाई जाए ताकि मंदिर की व्यवस्थाओं को डिजिटल बनाया जा सके।
बैठक के दौरान मंदिर परिसर और चंद्रपुरा में स्थित अतिथि गृह में लाइट सौर ऊर्जा से चलाने पर भी चर्चा हुई। दर्शन करने के लिए आने वाले भक्त शिवना नदी में पूजन सामग्री प्रवाहित करते हैं। भक्तों को नदी में पूजन सामग्री डालने से रोकने के लिए मंदिर परिसर में विशेष कलश लगाने पर भी विचार हुआ है। ताकि भक्त सामग्री उसमें डाल सके और नदी प्रदूषित न हो। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर भी चर्चा हुई।






