दिव्यांगों के लिये मंत्री का अपमानजनक संबोधन, वीडियो वायरल

दिव्यांगों के लिये मंत्री का अपमानजनक संबोधन, वीडियो वायरल

भोपाल।
कांग्रेस की सरकार करीब 15 सालों बाद मध्यप्रदेश में लौटी है, बावजूद इसके सत्ता का नशा नेताओं के सिर चढ़ बोल रहा है।आए दिन मंत्री-विधायकों के बड़बोलेपन का उदाहरण देखने को मिल रहा है, मर्यादा ताक कर रख नेता विवादित बयान देकर मीडिया मे सुर्खियां बटोर रहे है। ताजा मामला मंदसौर से सामने आया है, जहां कमलनाथ सरकार में जल संसाधन मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा के किसान कर्ज माफी सम्मेलन में बोल बिगड़े गए।कराड़ा ने यहां दिव्यांगों को लंगड़े-लूले और अंधे कहकर संबोधित किया। वहीं एक किसान ने समस्या बताई तो उसे धमकाते हुए कहा कि ये हरकत उनके क्षेत्र में की होती तो वहीं जूते मारते।अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

दरअसल, गुरुवार को जल संसाधन मंत्री और जिला प्रभारी मंत्रीहुकुम सिंह कराड़ा मंदसौर के सीतामऊ में आयोजित किसान कर्ज माफी सम्मेलन में पहुंचे थे।यहां तहसील स्तरीय किसान कर्जमाफी शिविर में 4600 किसानों को प्रमाण पत्र बांटे गए । इसके बाद कराड़ा ने सभा को संबोधित किया और विपक्ष पर जमकर हमला बोला। इसी दौरान बोलते बोलते कराडा के बोल बिगड़ गए और उन्होंने दिव्यांगों को लंगड़े-लूले और अंधे कह डाला।उन्होंने कहा कि लंगड़े-लूलों की पेंशन 300 रुपए से बढ़ाकर 1 हजार रुपए कर दी है विरोधियों का पेट दर्द कर रहा है।

वही मंत्री जी के भाषण के दौरान एक किसान सत्यनारायण पिता नृसिंह रेवारी निवासी नयाखेड़ा ने खड़े होकर अपनी नामांतरण ना होने की समस्या बताई लेकिन सुनवाई नही हुई और उसे बीच में से ही चुप करवाकर बैठा दिया। फिर वह पत्रकारों से चर्चा करने चला गया। इसके बाद जैसे ही भाषण खत्म हुआ मंत्री जी किसान पर भड़क उठे और कहा तू वही है ना जो भाषण के दौरान बीच में बोल रहा था। यदि यह हरकत मेरे क्षेत्र शाजापुर में की होती तो वहीं जूते मारता।इस दौरान किसी ने मंत्री का ये वीडियो बना लिया जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बीजेपी नेता ने बोला हमला
विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने ट्वीट करते हुए कहां कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांग पुकारे जाने वालों को निशक्त फिर दिव्यांग के नाम से पुकारकर सम्मान दिया, लेकिन मंदसौर जिले के प्रभारी मंत्री हुकमसिंह कराड़ा ने लूले-लंगड़े, अंधे कह कर क्या संदेश दिया?

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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