भीम आर्मी के खिलाफ सपाक्स पार्टी ने दिया ज्ञापन

भीम आर्मी के खिलाफ सपाक्स पार्टी  ने दिया ज्ञापन

मुरैना| संजय दीक्षित| सपाक्स पार्टी और सवर्ण एकता मंच ने गुरुवार को भीम आर्मी के लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी की मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन दिया है।सवर्ण एकता मंच के सम्भागीय अध्यक्ष दिनेश डंडोतिया और सपाक्स के जिलाध्यक्ष दीपक उपाध्याय ने बताया कि नरेश शर्मा तहसीलदार एवं समस्त सामान्य वर्ग को गाली देने बाले विशेष समुदाय के लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

भीम आर्मी के अध्यक्ष व अन्य लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर कल दिनाँक 23 जून को एक पोस्ट डाली गई जिसमें “आरक्षण विरोधी लोगों को जूते मारो सालों को ” जैसे गाली गलौज वाले शब्द लिखे गए थे। जिससे सवर्ण समाज में भारी आक्रोश औऱ क्षोभ कारित हुआ है औऱ दो समुदायों ,वर्गो के बीच नफरत ,विद्वेष व शत्रुता फैलाने वाला माना है ।जिससे राष्ट्रीय एकता पर भी विपरीत असर पड रहा है। उक्त लोगों के द्वारा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का कार्य किया जा रहा है। ऐसे लोगों पर आईपीसी व आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए और 27 जून को भीम आर्मी के कार्यक्रम की परमीशन को रद्द किया जाए। अगर परमीशन रद्द नहीं की गई तो दिनांक 27 तारीख को भीम आर्मी एवं समस्त सवर्ण समाज आमने-सामने होगा और इसकी समस्त ज़बाब देही शासन और प्रशासन की होगी।ज्ञापन देने वालों में स्वर्ण एकता मंच के संभागीय अध्यक्ष दिनेश डंडोतिया, जिला अध्यक्ष दीपक उपाध्याय ,भूपेंद्र बालोठिया,जिला संयोजक गुड्डू सिकरवार ,सोनू शुक्ला जिला प्रभारी ,तपन सिकरवार पंकज तोमर ,राहुल पाठक,संजू गोस्वामी, अखलेश पाराशर सहित काफी संख्या में स्वर्ण एकता मंच और स्पाक्स के लोग एकत्रित थे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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