शराब दुकान में चोरी करने गए युवक को मारी गोली, घटना सीसीटीवी में कैद।

शराब दुकान में चोरी करने गए युवक को मारी गोली, घटना सीसीटीवी में कैद।

मुरैना| संजय दीक्षित| सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सेल टैक्स बैरियर के पास अंग्रेजी शराब की दुकान के पीछे एक युवक का शव बरामद हुआ है। युवक के शरीर में गोली के निशान भी है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी विनय यादव पुलिस की टीम को लेकर मौके पर पहुँच गए। मृत युवक के शव को खेत से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हँसराज सिंह ने बताया कि बीती रात पुलिस को सूचना मिली कि खेतों में एक व्यक्ति का शव पड़ा हुआ है पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि तीन चोर अंग्रेजी शराब की दुकान में चोरी करने की नियत से घुसे थे।दो चोर शटर तोड़कर अंदर घुस गए और एक युवक बाहर खड़ा हुआ था। शटर की आवाज सुनकर पड़ोसी ने आवाज दी तो युवक ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।जिसके बाद जबावी कार्यवाही में आसपास के लोगो ने भी पत्थर से हमला कर दिया और लाइसेंसी बंदूक से युवक पर फायर कर दिया।जिससे गोली युवक की छाती में जा लगी। दुकान के अंदर से गोली की आवाज सुनकर बाहर आये दोनों चोर गल्ला चुराकर मृत युवक को खेत मे छोड़कर भाग गए।घटना सीसीटीवी में कैद हो गयी हैं।मृतक की पहचान नरेश पुत्र सूरत राम कुशवाह निवासी नाका के रूप में हुई है।मृतक के ऊपर चोरी के कई मामले दर्ज थे। पुलिस ने मर्ग कायम कर प्रकरण को विवेचना में ले लिया है।अंग्रेजी शराब के ठेकेदार ने सिविल लाइन थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई है कि गुरुवार शुक्रवार की दरमियानी रात को शटर के ताले तोड़कर गल्ले में रखे ₹15000 अज्ञात चोर चोरी कर ले गए ।ठेकेदार की रिपोर्ट पर भी मामला दर्ज कर लिया है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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