बेस्ट बॉडी बिल्डिंग में यूनुस खान ने चैंपियन ऑफ चैंपियन शिप का खिताब जीत

बेस्ट बॉडी बिल्डिंग में यूनुस खान ने चैंपियन ऑफ चैंपियन शिप का खिताब जीत

मुरैना। संजय दीक्षित।

युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहे बॉडी बिल्डिंग का शौक देश विदेशों में दिखाई दे रहा है।बॉडी बिल्डिंग के खेल का आयोजन रविवार को ग्वालियर व्यापार मेले में देखने को मिला।जिसमें काफी संख्या में लोग एकत्रित थे।मेला रंग मंच पर पोज देने वाले बॉडी बिल्डरों का लोगों ताली बजाकर होंसला बढ़ाया।यह शानदार आयोजन ग्वालियर व्यापार मेले के रंगमंच कार्यक्रम स्थल पर संपन्न हुआ । जिसमें करीब एक सैंकड़ा से अधिक बॉडी बिल्डरों ने हिस्सा लिया ।संगीत की मधुर धुन पर सभी साधकों ने अपनी प्रस्तुति दी।यह प्रतियोगिता वजन वर्ग के आधार पर सम्पन्न हुई। जिसमें मुरैना के बेस्ट बॉडी बिल्डिंग यूनुस खान ने 65 से 70 किलोग्राम वजन में चैंपियन ऑफ चैंपियन शिप का खिताब जीता ,तो वहीं अजय शर्मा ने दूसरा स्थान, 75 किलोग्राम भार सुधांशु वर्मा ने प्रथम और नीरज यादव ने दूसरा स्थान, 80 किलोग्राम भार में शुभ डंडोतिया ने प्रथम और मयंक सिकरवार ने दूसरा स्थान प्राप्त कर मुरैना जिले का नाम रोशन किया ।पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि मेलाप्राधिकरण के अध्यक्ष प्रशांत गंगवाल, उपाध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल, नवीन पांडे संयोजक, सांस्कृतिक महबूब चैन वाले, शील खत्री, सुधीर मंडेलिया, ट्रैफिक डी एस पी अन्नोंटिया उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मनोज पाठक ने किया एवं आभार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष गजेंद्र तिवारी के द्वारा व्यक्त किया गया । इस प्रतियोगिता में बॉडी बिल्डिंग एसोसिएशन के सचिव अभिषेक तोमर एवं कोषाध्यक्ष नमित सक्सेना और मनोज सक्सेना की मार्शल स्टेज में अहम भूमिका रही।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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