जिला अस्पताल में कोरोना संक्रिमत मरीजों ने खोली पोल, हॉस्पिटल प्रबंधन पर लगाये गंभीर आरोप

जिला अस्पताल में कोरोना संक्रिमत मरीजों ने खोली पोल,  हॉस्पिटल प्रबंधन पर लगाये गंभीर आरोप

मुरैना।संजय दीक्षित

जिला अस्पताल के कोरोना संक्रमित भर्ती मरीजों ने अव्यवस्थाओं को देखते हुए अपने-अपने वीडियो फेसबुक पर वायरल कर दिए हैं। भर्ती मरीजों ने कहा है कि करीब 10 दिन से आज जिला अस्पताल में भर्ती है, लेकिन कोई भी सुविधा मुहैया नहीं करायी जा रही है । समय पर नाश्ता, खाने-पीने की सामग्री दवाइयां जैसी अन्य सुविधाएं समय पर नहीं मिल रही है।जिसके कारण लोग काफी चिंतित हैं। पीने के पानी और नहाने के पानी की भी समस्या काफी है।

जिसके चलते आज कोरोना संक्रमित वार्ड में भर्ती मरीजों ने जिला अस्पताल में सीएमएचओ और सिविल सर्जन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भोजन सामग्री का बहिष्कार किया।जिसका वीडियो भी वायरल हो रहा है। जिला अस्पताल में सीएमएचओ, सीएस और आरएमओ की मनमानी से भर्ती मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है कुछ मरीजों ने सीएस को फोन लगाकर बताया कि हमें सुबह से दोपहर तक नाश्ते और खाने की व्यवस्था नही की गई है और दवाइयां भी समय उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।

जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों का कहना है कि जिला अस्पताल के कोरोना वार्ड में लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी सारी व्यवस्थाएं ठप्प पड़ी हुई है ।खाने पीने की व्यवस्था, सफाई की व्यवस्था और दवाइयों की सारी व्यवस्था बुरी तरह ठप्प पड़ी हुई है।इन सारी व्यवस्थाओं के बारे में सीएमएचओ और सिविल सर्जन को भी अवगत कराया गया है लेकिन उन्होंने अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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