माल जब्त करने गए प्रशासन और व्यापारियों में विवाद, सोशल डिस्टेंसिंग की उडी धज्जियां

माल जब्त करने गए प्रशासन और व्यापारियों में विवाद, सोशल डिस्टेंसिंग की उडी धज्जियां

मुरैना| संजय दीक्षित| लोकडाउन (Lockdown) के दौरान बाजार में ओड इवन वाली दुकानो की प्रशासन को शिकायत मिल रही थी कि कुछ दुकानदार बिना नंबर के दुकानों का आधा शटर उठाकर सामान बेच रहे है। व्यापारियों की शिकायत पर आज नगर निगम और प्रशासन का अमला कार्यवाही करने के लिए बाजार में गया था। तभी दुकानदारों और एसडीएम बांकना के बीच सामान उठाने को लेकर विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन का अमला भारी संख्या में पहुंच गया।

दुकानदारों का कहना था कि अगर कोई दुकान खुली है तो उसकी रशिद काटी जाए न कि सामान को भरकर ले जाया जाए।जब पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे तो सफेद पॉश नेताजी निकल कर आये और सोशल डिस्टेन्स की धज्जियां उड़ाते हुए प्रशासन के अधिकारियों को आड़े हाथ लिया। तभी क्लब के एक अधिकारी ने घटनाक्रम का वीडियो बना कर वायरल कर दिया। इस बात को लेकर प्रशासन सकते में आ गया और पब्लिक भी अधिकारियों पर टूट पड़ी और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए बाजार बंद करने लगे। सूचना मिलते ही सीएसपी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने व्यापारियों से बात करने के बाद मामले को शांत कराया और जप्त माल को वापस कराया गया।तब कहीं जाकर व्यपारियों का गुस्सा शांत हुआ।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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