पुलिस की अनोखी गांधीगिरी, हाथ जोड़कर निकाला मार्च, लोगों से सुरक्षित रहने की अपील

पुलिस की अनोखी गांधीगिरी, हाथ जोड़कर निकाला मार्च, लोगों से सुरक्षित रहने की अपील

मुरैना/संजय दीक्षित

हमेशा से हमारे मन में पुलिस की एक रौबदार कड़क छवि बनी हुई है, लेकिन इस लॉकडाउन के समय पुलिस के कई अलग अलग रूप सामने आ रहे हैं। कई लोग अब भी स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ पा रहे हैं और लगातार सड़कों पर निकल रहे हैं। ऐसे में पुलिस प्रशासन पर व्यवस्था बनाए रखने के साथ लोगों को समझाना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है।

कई जगह पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ रहा है, कहीं धमकाना भी पड़ रहा है और कई जगह पुलिस गांधीगिरी का भी प्रयोग कर रही है। ऐसा ही नजारा मुरैना में देखने को मिला जहां पुलिस ने हाथ जोड़कर मार्च निकाला और गली मोहल्लों में भ्रमण करते हुए हाथ जोड़कर लोगों से सुरक्षित रहने की अपील की। इस दौरान मास्क पहने हुए पुलिसकर्मी, जिनमें महिला पुलिस भी शामिल थीं गली गली गए और लोगों से अपील की कि लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, खुद को स्वच्छ रखें, घरों से न निकलें तथा पुलिस की सहायता करें।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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