बसपा से सोवरन सिकरवार और सपा से हरिश्चन्द्र सिकरवार भाजपा में शामिल, 5 हज़ार लोगों के साथ ली सदस्यता

बसपा से सोवरन सिकरवार और सपा से हरिश्चन्द्र सिकरवार भाजपा में शामिल, 5 हज़ार लोगों के साथ ली सदस्यता

मुरैना, संजय दीक्षित| उपचुनाव (Byelection) के लिए जारी जंग में नेताओं के दलबदल का दौर जारी है| आज मुरैना (Morena) में बसपा (BSP) से सोवरन सिकरवार और सपा (Samajwadi Party) से हरिश्चन्द्र सिकरवार ने पार्टी छोडकर पांच हज़ार लोगों के साथ भाजपा की सदस्यता ली।

बीजेपी प्रत्याशी एदल सिंह कंसाना के समर्थन में गलेथा गांव में सभा को संबोधित करते हुए सोवरन ने कहा कि मैं पूर्व में धौलपुर जिले का विश्व हिंदू परिषद का जिलाध्यक्ष था। विश्व हिंदू परिषद में बहुत काम किया है। आज में बीएसपी छोड़कर बीजेपी में सदस्यता ले रहा हूँ और सिकरवारी में भाजपा का झंडा ऊंचा करूँगा। तन मन धन से एदल सिंह का साथ दूंगा।

इस अवसर पर उनके छोटे भाई हरिश्चंद्र सिकरवार ने सिकरवारी का आगाज करते हुए कहा कि में झूठ नही बोलता में एदल सिंह कहने से चुनाव नही लड़ा था।लोगों ने गलत अफवाह फैलाई फिर आपने हमारा मान सम्मान रखा। उन्होंने दो बच्चो की कसम खायी और यह भी कहा कि में सबको विश्वास दिलाता हूँ कि हरिश्चंद्र कभी न बिकता है ना कभी किसी गुंडे के सामने सिर को झुकाता है।केंद्रीय मंत्री तोमर के कहने से पार्टी जॉइन करी। श्री तोमर राजनीति का बहुत बड़ा पावर हाउस हैं।जहाँ सैकंडो डीपियां और सैंकड़ों सब स्टेशन निकलते है फिर लाइट जलती हैं। मंत्री जी को भरोसा दिलाना चाहता हूँ कि हरिश्चंद्र गद्दारी नहीं करता और अपने सर को कटा देगा लेकिन आज हम दोनों भाइयों ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली।क्योंकि हम नहीं चाहते थे की एक भाजपा में रहे और दूसरा कांग्रेस में रहे।वे कहते हैं कि जनता जानती है। ऐसे लोग व्यवसायी होते हैं। दोनों पार्टिया धंधा करने वाले नहीं हैं। हम बाल्मिक समाज से लेकर ब्राह्मण समाज तक हर व्यक्ति के दरवाजे पर जाते है।मैंने सुना था कि गलेथा गांव में कांग्रेस की महापंचायत हो गई है लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। बीएसपी को छोडकर बीजेपी में करीब पांच हजार लोगों ने सदस्यता ग्रहण की।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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