नेताओ के बाद सन्त भी हुये बदजुबान, आचार्य प्रमोद कृष्णम नेताओ को कुत्ते और पिल्ले कह बैठे

नेताओ के बाद सन्त भी हुये बदजुबान, आचार्य प्रमोद कृष्णम नेताओ को कुत्ते और पिल्ले कह बैठे

अशोकनगर, हितेंद्र बुधोलिया| इस समय मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) में 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव (Byelection) की तैयारिया चल रही है । प्रचार के दौरान राजनेताओं के द्वारा विवादित बयान एवं भाषाई गरिमा को जमकर तार तार किया गया है। राजनेताओं से तो लोगों को अक्सर इस तरह की चीजें सुनने को मिलती मिलती रही है। जो साधु संत समाज को दिशा एवं संस्कार देते है अगर राजनैतिक मंचो से वही भाषा की मर्यादा तोडने लगे तो क्या कहा जाए।

आज अशोकनगर में कमलनाथ (Kamalnath) की सभा में द्व आचार्य प्रमोद कृष्णम (pramod krishnam) के द्वारा भाषा के स्तर को गिरा कर बहुत अभद्र एवं अशिष्ट बात मंच से कही । सफेद चोगा पहने इन सन्त ने भाषा की जो मर्यादा कराई और जितने अमर्यादित ढंग से बात कही वह तो नेता भी नहीं कह पाए ।

भाषण के दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम कहने लगे कि कमलनाथ ने जब माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाया था। तब अशोकनगर के विधायक का भी उसमें नाम था। इसके बाद आचार्य प्रमोद कृष्णन बोले की कमलनाथ उस पर कार्रवाई करने वाले थे। मगर जिस तरह पिल्ले को कुत्ता बचाता है। उसी तरह उस समय इस को बचा लिया गया । मगर 10 तारीख के बाद जब कांग्रेस की सरकार बनेगी तो उसकी संपत्तियों पर बुलडोजर चला दिया जाएगा और इसे जेल में डाल दिया जाएगा। एक सन्त के द्वारा कुत्ते और पिल्ले जैसी अशिष्ट भाषा का उपयोग किया गया। उसकी लोगों ने जमकर निंदा की है।

इससे पहले एक चुनावी सभा में प्रमोद कृष्णम ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तुलना कंस, शकुनि और मारीच से की थी। जिसकी शिकायत बीजेपी ने चुनाव आयोग में की थी|

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews