अनूपपुर उपचुनाव: मैदान में 12 प्रत्याशी, वोटिंग से पहले घर-घर किया जनसंपर्क

अनूपपुर उपचुनाव: मैदान में 12 प्रत्याशी, वोटिंग से पहले घर-घर किया जनसंपर्क

अनूपपुर, वेद शर्मा| प्रदेश के अनूपपुर विधानसभा (Anuppur assembly) सहित 28 विधानसभा क्षेत्रों में 3 नवम्बर को सम्पन्न होने वाले उपचुनाव सत्ताधारी भाजपा, विपक्षी पार्टी कांग्रेस दोनों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है। प्रचार समाप्ति के बाद 2 नवबंर को उम्मीदवारों ने मतदाताओं के घरों में दस्तक देकर अपने पक्ष में मतदान की अपील की। 3 नवम्बर की सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक 251 बूथों पर मतदान सम्पन्न कराए जाएंगे।

उपचुनाव में अपनी किस्मत आजमाने 12 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे हैं। लेकिन अबतक हुए चुनाव के प्रचार प्रसार और मतदाताओं की खामोशी में इनके चेहरो पर चिंता की लकीर खींच दी है। हर उम्मीदवार अपनी जीत के लिए दांव पेंच आजमा चुकें है। रविवार 1 नवम्बर को चुनावी प्रचार प्रसार थमने के बाद सोमवार को उम्मीदवारों ने मतदाताओं घर-घर पहुंच हाथ जोड़ कर अपनी जीत को अश्वस्त किया। कोविड गाइडलाइन अनुसार उम्मीदवार अपने लाव लाश्कर लेकर नहीं बल्कि

छोटे-छोटे समूहों में जनसम्पर्क अभियान में चलाया
अनूपपुर विधानसभा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित अनूपपुर विधानसभा सीट हैं| जहां उपचुनावी मैदान में पूर्व की भांति दो मुख्य राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशियों में भाजपा के बिसाहूलाल सिंह और कांग्रेस के विश्वनाथ सिंह कुजांम के बीच है। जहां विश्वनाथ पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं बिसाहूलाल सिंह के लिये विधानसभा का यह नौवां चुनाव है। बिसाहूलाल 5 बार विधायक रह चुके हैं। दिग्विजय शासन काल में 10 साल तक कैबनेट मंत्री रहे। कमलानाथ सरकार में मंत्री नहीं बनाये जाने से नाराज बिसाहूलाल इस्तीफ़ा देकर भाजपा में शामिल हो गये।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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