कंप्यूटर बाबा ने खेली कबड्डी, बोले- यहां तय होता है गद्दारों के लिए कब कौन सा दांव लगाया जायेगा

computer-baba kabaddi

ग्वालियर, अतुल सक्सेना| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) में 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव (By-election) में कांग्रेस (Congress) को जीत दिलाने का संकल्प लेकर निकले कंप्यूटर बाबा (Computer Baba) ने नया और अलग तरीका निकाला है। लोकतंत्र बचाओ यात्रा लेकर ग्वालियर पहुंचे कंप्यूटर बाबा ने साथी साधुओं के साथ कबड्डी (Kabaddi) खेली और कहा कि हम कबड्डी खेलकर तय करते हैं कि 25 गद्दारों को बाहर करने के लिए उनके खिलाफ कब कौन सा दांव लगाया जाए।

कांग्रेस सरकार को गिराने वाले पूर्व विधायकों को गद्दार बताते हुए उनको सबक सिखाने के लिए कंप्यूटर बाबा लोकतंत्र बचाओ यात्रा पर निकले हैं व प्रदेश की उन सीटों पर जा रहे हैं जहाँ के पूर्व विधायकों ने धोखा देकर कांग्रेस की चुनी हुई सरकार को गिराया।

रविवार को ग्वालियर पहुंचे कंप्यूटर बाबा ने माधव डिस्पेंसरी के सामने जैन छात्रावास प्रांगण में अपने साथी साधुओं के साथ कबड्डी खेली। कबड्डी खेलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि कबड्डी हमारा प्राचीन खेल है। हम तीन-चार रोज में एक बार कबड्डी खेलकर अपने दांव-पेंच आजमाते रहते हैं। क्योंकि 25 गद्दारों के खिलाफ कब, कौन सा दांव, कहां लगाना है जिससे इन गद्दारों को चारों खाने चित्त किया जा सके, इसका अभ्यास किया जाता है। खास बात यह है कि पत्रकारों से बातचीत में कम्प्यूटर बाबा ने कहीं भी सिंधिया या सिंधिया समर्थकों का नाम नहीं लिया । हर बार उनका नाम लिए बगैर गद्दार शब्द से संबोधित करते हुए राज्य सभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना साधा।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews