शिवराज के रोड शो में लगे दिग्विजय सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे, देखिये वीडियो

शिवराज के रोड शो में लगे दिग्विजय सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे, देखिये वीडियो

राजगढ़, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) की 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव (Byelection) के लिए रविवार शाम को प्रचार का शोर थम गया| अंतिम दिन बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) नेताओं ने पूरी ताकत झोंकी| मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh CHauhan) ने ब्यावरा विधानसभा (Biaora Assembly) ज़िला राजगढ़ में रोड शो किया| इस रोड शो में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay SIngh) के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगे| इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है|

रविवार को ब्यावरा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी नारायण सिंह के पक्ष में चुनावी सभा संबोधित करने के साथ ही ‘रोड शो’ किया। इस दौरान रोड़ शो में आगे चल रहे युवा नारेबाजी कर रहे थे “गली गली में शोर है दिग्गीराजा चोर है”| राजगढ़ दिग्विजय के गढ़ के नाम से जाना जाता है । शिवराज सिंह के इस रोड शो में बड़ी संख्या में लोगो की भीड़ उमड़ी, रोड शो के दौरान शिवराज सिंह पर लोगो ने फूल बरसाए ।

दिग्विजय सिंह पर बरसे शिवराज
सभा को सम्बोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा दिग्गी राजा के राज में तीन-चार घंटे बिजली आती थी। मैंने 24 घंटे बिजली देने की बात की, तो उन लोगों ने मेरा मजाक उड़ाया था। आज प्रदेश में 24 घंटे बिजली मिल रही है। मैं जो कहता हूं, करता हूं। जो हर समय पैसों का ही रोना रोता रहे, तो ऐसे मुख्यमंत्री का जनता क्या करेगी? कमलनाथ जी हर समय पैसों के अभाव का रोना रोते रहते थे।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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