किसानों को साधने में जुटी भाजपा और कांग्रेस, वादों और आश्वासन की झड़ी

किसानों को साधने में जुटी भाजपा और कांग्रेस, वादों और आश्वासन की झड़ी

मंदसौर, तरुण राठौर| सुवासरा विधानसभा में उपचुनाव (Byelection) को लेकर चल रहे महासंग्राम के बीच दोनों ही पार्टी किसानों को अपने पक्ष में करने में लगी है। इसके लिए वह दिनरात एक कर रैलियां ओर सभा कर उनके बीच में पहुंचकर अपने आपको किसान समर्थक व दूसरी पार्टी के प्रत्याक्षी को किसान विरोधी बताने से बाज नहीं आ रहे है। इसी के चलते रोजाना दोनों ही पार्टी के बड़े नेता क्षेत्र में डटे हुए। वहीं कई स्टार प्रचारक (Star Campaigner) भी अपने अपने समर्थ के पक्ष वोट दिलाने के लिए मेहनत कर रहे है।

भाजपा (BJP) जहां 15 महीने की कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) को किसान विरोधी और धोखेबाज बता रही है। ताकि वह कांग्रेस (Congress) को वोट न देकर बीजेपी को दे। जबकि कांग्रेस शिवराज सरकार (Shivraj Government) के साथ ही मंत्री हरदीपसिंह को गद्दार कहने से बाज नहीं आ रहे है। ताकि वह किसानों को अपने समर्थन में लेकर सुवासरा विधानसभा सीट को हासिल कर सके।

एड़ी चोटी का जोर लगा रहे शिवराज
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यहां जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं| यही वजह है कि इस विधानसभा सीट पर एक बार नहीं दो बार सीएम आ चुके है। साथ ही खुद को किसान हितेषी बताते हुए इस क्षेत्र को कई सौगात दी। यह भी वादा किया है कि यदि चुनाव होने के बाद उनकी सरकार बचती है तो वह यहां के किसानों को कई और सौगात देंगे। जब कमलनाथ इस क्षेत्र में आए थे तो वह भी किसानों को इसी प्रकार का आश्वासन देकर गए। किसानों को साधने की कोशिश जारी है, अब देखना होगा किसान किसके वादों से प्रभावित होता है|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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