हाटपिपल्या की राजनीति का केंद्र बनी थी यह सड़क, जनता को हमेशा रहेगी याद

हाटपिपल्या की राजनीति का केंद्र बनी थी यह सड़क, जनता को हमेशा रहेगी याद

हाटपिपल्या, सोमेश उपाध्याय| हाटपिपल्या (Hatpipliya) में मंगलवार को उपचुनाव (Byelection) सम्पन्न हो जाएंगे। लेकिन बीते तीन वर्षों से हाटपिपल्या की राजनीति की सबसे प्रमुख केंद्र बिंदु रही नेवरी से चापड़ा की चर्चित सड़क लोगो को हमेशा याद आएगी। 21 किलोमीटर की यह सड़क क्षेत्र को जिला मुख्यालय से जोड़ती है परन्तु इसकी हालत इतनी खराब थी कि गाड़ी चलाना तो दूर सड़क पर पैदल चलना भी दुस्वार था।

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भी यही सड़क प्रमुख मुद्दा थी। सूत्र कहते है कि पूर्व मंत्री की पराजय का कारण भी यही सड़क बनी। परन्तु 2018 के चुनाव के बाद भी इस सड़क पर सियासत खत्म नही हुई। कांग्रेस शासन में विज्ञप्ति व टेंडर निकलने के बाद भी सड़क निर्माण शुरू नही हुआ।बीजेपी ने भी इसी सड़क के सहारे कांग्रेस को घेरने का खूब प्रयास किया। लेकिन इस वर्ष जब प्रदेश में सत्ता उलटफेर के दौरान जब हाटपिपल्या विधायक मनोज चौधरी ने भी इस्फ़ीफ़ा दिया तो बेंगलुरु के रिसोर्ट से इसी सड़क का हवाला देते हुए पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा पर सहयोग न करते हुए भेदभाव पूर्ण रवैये का आरोप लगाया था|

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उपचुनाव के पहले ही सड़क निर्माण की मंजूरी दे कर करोड़ो की राशि स्वीकृत कर दी। लेकिन सड़क की कहानी आसान कहा थी| भूमिपूजन के बाद ही कांग्रेस ने भी पत्रकार वार्ता कर बताया कि सड़क को तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री सज्जनसिंह वर्मा ने स्वीकृत किया था। सड़क निर्माण के लिए 19 करोड़ 72 लाख 78 हजार की राशि जारी की थी।

इस सड़क का जिक्र सीएम शिवराज सिंह चौहान को भी कई बार करना पड़ा था। हाल ही में चुनावी प्रचार के अंतिम दिन भी सीएम शिवराज ने इस सड़क का जिक्र कर मतदान की अपील की थी। भाजपा जनता का आक्रोश 2018 के चुनाव में देख चुकी थी। बहरहाल सरकार ने इस बार कोई भी रिस्क लेना उचित नही समझा और निर्माण कार्य की स्वीकृति उपचुनावों के पूर्व ही आरम्भ करा दी। अब सड़क निर्माण शुरू हो चुका है और सम्भवतः कुछ महीनों में 21 किलोमीटर की यह सड़क बन कर तैयार हो जाएगी। लेकिन जनता के जेहन में इस सियासी सड़क की यादें बनी रहेंगी।

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निदेशक और संपादक

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