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विकास कार्य रुके तो सरपंच ने खुद को पंचायत भवन में किया बंद, दी जान देने की चेतावनी

Written by:Bhawna Choubey
Published:
नरसिंहपुर के सीरेगांव में सरपंच के पंचायत भवन में बंद होने की घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया है। विकास कार्य रुकने, फंड मंजूरी में देरी और अधिकारियों पर अनसुनी के आरोप के बीच मामला अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
विकास कार्य रुके तो सरपंच ने खुद को पंचायत भवन में किया बंद, दी जान देने की चेतावनी

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक छोटे से गांव सीरेगांव से ऐसी खबर सामने आई जिसने प्रशासन और ग्रामीण राजनीति दोनों को हिला दिया। गांव की आबादी भले करीब 1400 हो, लेकिन यहां उठी आवाज अब जिले भर में चर्चा का विषय बन चुकी है। गांव के चुने हुए सरपंच महेंद्र सिंह कुशवाहा ने खुद को पंचायत भवन के अंदर बंद कर लिया और कहा कि जब तक गांव के विकास कार्य शुरू नहीं होंगे, वे बाहर नहीं निकलेंगे।

मिली जानकारी के मुताबिक गांव वालों ने उन्हें उम्मीद के साथ चुना था, लेकिन अब सरपंच का आरोप है कि कुछ अधिकारी और स्थानीय लोग विकास योजनाओं को आगे बढ़ने नहीं दे रहे। इसी नाराजगी के चलते यह कदम उठाया गया, जिसने पूरे इलाके में बेचैनी पैदा कर दी है।

आखिर मामला क्या है?

सीरेगांव के सरपंच महेंद्र सिंह कुशवाहा पढ़े-लिखे हैं और उन्होंने पंचायत चुनाव 172 वोटों से जीता था। उनका कहना है कि गांव की जनता ने उन्हें विकास के लिए चुना, लेकिन पंचायत स्तर पर योजनाएं अटक रही हैं। सरपंच का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायतें दीं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सड़कों का काम, पानी की व्यवस्था, नाली निर्माण और अन्य जरूरी काम फाइलों में ही अटके पड़े हैं। जब लगातार शिकायतों के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ा तो उन्होंने विरोध का रास्ता चुना। इसी के तहत सरपंच ने खुद को पंचायत भवन में बंद कर लिया और प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश शुरू कर दी।

आत्मदाह की चेतावनी ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता

घटना ने तब गंभीर रूप ले लिया जब सरपंच ने चेतावनी दी कि अगर उनकी पंचायत के विकास कार्यों के लिए फंड जारी नहीं हुआ और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठा सकते हैं। यह बयान सामने आने के बाद प्रशासन भी सतर्क हो गया है। स्थानीय अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और सरपंच को समझाने की कोशिश की जा रही है।