इन शिक्षकों-कर्मियों को लगा बड़ा झटका, अब नहीं मिलेगा मानदेय, सरकार ने जारी किए आदेश, जानें कारण?

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Madarsa Board Teachers Honorarium stop :उत्तर प्रदेश के मदरसों के शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। केंद्र के बाद अब यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भी मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान व सामाजिक अध्ययन विषय के लिए रखे गए शिक्षकों को मिलने वाले अतिरिक्त मानदेय को रोक दिया है। इस फैसले के बाद करीब 25000 मदरसा शिक्षकों का मानदेय खत्म हो गया है। इधर, वेतन बंद किए जाने के बाद शिक्षकों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। इधर, मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है और इसे बहाल करने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला

  • दरअसल, मदरसा आधुनिकीकरण योजना केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसे 1993-94 से संचालित किया जा रहा था। इसमें मदरसों में हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित व सामाजिक अध्ययन विषय को पढ़ाने के लिए शिक्षक रखे गए थे। इस योजना में तैनात स्नातक पास शिक्षकों को 6000 व परास्नातक शिक्षकों को 12000 प्रति माह मानदेय दिया जाता था।
  • इसके बाद मोदी सरकार ने वर्ष 2008 से इस योजना का नाम बदलकर ‘स्कीम फार प्रोवाइडिंग क्वालिटी एजुकेशन इन मदरसा’ (एसपीक्यूईएम)कर दिया।वही पूर्व की अखिलेश यादव सरकार ने वर्ष 2016 में इसमें अपनी ओर से 2000 व 3000 प्रतिमाह बढ़ा दिया, जिससे स्नातक शिक्षकों को 8000 व परास्नातक शिक्षकों को 15000 रुपये मिलने लगे।
  • केंद्र सरकार से इस योजना को वर्ष 2021-22 तक स्वीकृति दी थी, जो समाप्त हो चुकी है, वही अब योगी सरकार ने भी इसे बंद करने का फैसला लिया है। इस संबंध में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव हरि बख्श सिंह ने बजट में की गई अतिरिक्त मानदेय की व्यवस्था को समाप्त करने का आदेश जारी किया है।उन्होंने निदेशक को इस मद में कोई भी वित्तीय स्वीकृति न जारी करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद सभी जिलों में मानदेय देने पर रोक लगा दी गई है।हालांकि, प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने वेतन पर रोक लगाए जाने से इनकार करते हुए कहा है कि सरकार पिछले साल से अब तक के लंबित वेतन का भुगतान करेगी।

     

बोर्ड अध्यक्ष ने पीएम को लिखा पत्र

मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद ने पीएम नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर इसे फिर से बहाल करने का अनुरोध किया।जावेद का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा 6 साल पहले मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत अपना अंशदान बंद किए जाने के बाद राज्य सरकार ने भी इसी साल 5 जनवरी को एक आदेश जारी कर इस योजना के तहत पढ़ाने वाले शिक्षकों को मानदेय भुगतान के लिए अतिरिक्त वेतन पर रोक लगा दी गई है।  इस योजना के तहत कुल बजट का 60% अंशदान केंद्र सरकार, जबकि 40% का योगदान राज्य सरकार करती है। बता दे कि राज्य में 7,442 पंजीकृत मदरसों में 21,000 से अधिक आधुनिक शिक्षक तैनात हैं, जो करबी 10 लाख छात्रों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय पढ़ाते हैं।पंजीकृत मदरसों में से 560 सरकारी सहायता प्राप्त हैं।

Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

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