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नई दिल्ली में 28वें CSPOC सम्मेलन का शुभारंभ, प्रधानमंत्री मोदी ने किया उद्घाटन, 42 देशों के 61 स्पीकर्स शामिल

Written by:Shyam Dwivedi
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नई दिल्ली के संसद भवन परिसर में स्थित संविधान सदन में गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को तीन दिवसीय 28वें CSPOC सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता लोकसभा स्पीकर ओम बिरला कर रहे हैं।
नई दिल्ली में 28वें CSPOC सम्मेलन का शुभारंभ, प्रधानमंत्री मोदी ने किया उद्घाटन, 42 देशों के 61 स्पीकर्स शामिल

नई दिल्ली के संसद भवन परिसर में स्थित संविधान सदन में गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को तीन दिवसीय 28वें CSPOC सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता लोकसभा स्पीकर ओम बिरला कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CSPOC सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन में 42 देशों के 61 स्पीकर्स और ऑफिसर्स ने हिस्सा लिया है।

बता दें कि यह CSPOC का अब तक का सबसे बड़ा संस्करण है, जिसमें 42 राष्ट्रमंडल देशों के 61 स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स तथा 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन के बाद मुख्य संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती, भारत की भूमिका और वैश्विक चुनौतियों पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने बताया सेंट्रल हॉल का ऐतिहासिक महत्व

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में, आपकी भूमिका स्पीकर की होती है। दिलचस्प बात यह है कि स्पीकर को ज्यादा बोलने का मौका नहीं मिलता। उनका काम दूसरों को बोलते हुए सुनना है। आप सब जिस जगह पर बैठे हैं, वह बहुत अहम जगह है। उन्होंंने कहा कि गुलामी के आखिरी सालों में, जब भारत की आजादी तय हो चुकी थी, तो इसी सेंट्रल हॉल में संविधान की ड्राफ्टिंग के लिए संविधान सभा की बैठकें होती थीं। 75 सालों तक इसी बिल्डिंग ने भारत की संसद का काम किया, और इसी हॉल में हमारे भविष्य से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए और कई चर्चाएं हुईं। भारत ने लोकतंत्र को समर्पित इस जगह का नाम संविधान सदन रखा है। अभी थोड़ी देर पहले ही संविधान लागू होने की 75वीं सालगिरह थी। संविधान सदन में मेरी मौजूदगी और सभी बड़े लोगों की मौजूदगी, हमारी लोकतंत्र के लिए बहुत खास है।

CSPOC सम्मेलन की थीम- ‘संसदीय लोकतंत्र की असरदार डिलीवरी’

पीएम मोदी ने कहा कि यह चौथी बार है जब कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन भारत में हो रहा है। इस साल की थीम-“संसदीय लोकतंत्र की असरदार डिलीवरी”- आज के ग्लोबल संदर्भ में बहुत ज़रूरी है। जब भारत आज़ाद हुआ, तो दुनिया भर में इस बात पर बहुत शक था कि इतनी विविधता वाले देश में लोकतंत्र ज़िंदा रह पाएगा या नहीं। भारत ने इन डरों को गलत साबित किया और अपनी विविधता को अपनी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया। एक और डर यह था कि अगर लोकतंत्र किसी तरह बच भी गया, तो भारत विकास नहीं कर पाएगा।

भारत का तेजी से बढ़ता स्टार्ट-अप इकोसिस्टम

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने दिखाया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रोसेस डेमोक्रेसी को स्थिरता, गतिशीलता और समावेशिता देते हैं-सब एक ही समय में। आज, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी है। भारत का UPI दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन प्रोड्यूसर है। स्टील प्रोडक्शन में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है। भारत का रेल नेटवर्क दुनिया का चौथा सबसे बड़ा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क चलाता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध प्रोड्यूसर है। चावल प्रोडक्शन में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है।

उन्होंंने बताया कि हाल के सालों में, भारत में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। यह इस बात का सबूत है कि भारत में डेमोक्रेसी नतीजे देती है। क्योंकि देश के लोग हमारे गवर्नेंस के दिल में हैं।

महिला सशक्तिकरण की वैश्विक मिसाल

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र का एक और मजबूत पिलर महिलाओं का प्रतिनिधित्व है। आज, भारतीय महिलाएं न सिर्फ़ लोकतंत्र में हिस्सा ले रही हैं, बल्कि उसे लीड भी कर रही हैं। भारत की राष्ट्रपति, जो हमारे देश की पहली नागरिक हैं, एक महिला हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री-जिस शहर में हम आज मौजूद हैं- एक महिला हैं। भारत में ग्रामीण और लोकल बॉडीज में, लगभग 1.5 मिलियन चुनी हुई महिला प्रतिनिधि हैं। वे जमीनी स्तर पर लगभग 50 प्रतिशत लीडरशिप का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो दुनिया भर में पहले कभी नहीं हुआ।

उन्होंने कहा, भारतीय लोकतंत्र अपनी विविधता में भी अविश्वसनीय रूप से समृद्ध है। देश भर में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं। 900 से ज्यादा टेलीविजन चैनल अलग-अलग भाषाओं में ब्रॉडकास्ट होते हैं, और रोज़ाना हज़ारों अखबार और मैगजीन छपते हैं। यह जीवंतता, सबको साथ लेकर चलना और सबको साथ लेकर चलना ही भारतीय लोकतंत्र की असली ताकत है।