दिल्ली में जलभराव को लेकर AAP का BJP पर तीखा हमला, केजरीवाल ने उठाए सवाल

दिल्ली में जलभराव को लेकर AAP का BJP पर तीखा हमला, केजरीवाल ने उठाए सवाल

दिल्ली और एनसीआर में मंगलवार सुबह से हो रही लगातार बारिश ने आम लोगों की ज़िंदगी को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। जलभराव और ट्रैफिक जाम से लोग दिनभर परेशान रहे। इस बीच, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए राजधानी की हालत पर सवाल खड़े किए हैं।

अरविंद केजरीवाल का तीखा हमला

दिल्ली में जलभराव की समस्या को लेकर अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा सरकार पर सीधा हमला किया। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, जब दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस का ये हाल है, तो बाकी दिल्ली की हालत का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। सिर्फ 10 मिनट की बारिश में सड़कें तालाब बन गईं हैं। केजरीवाल ने आगे सवाल उठाते हुए कहा, 5 महीने में बीजेपी ने दिल्ली को कहां लाकर खड़ा कर दिया है? क्या यही है ‘4 इंजन’ की सरकार की रफ्तार?” उनके इस बयान के साथ कनॉट प्लेस की जलभराव वाली तस्वीर भी शेयर की गई, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

दिल्ली की सड़कें बनीं जलाशय, ट्रैफिक से लोग बेहाल

तेज बारिश के कारण राजधानी की मुख्य सड़कों पर भारी जलभराव हो गया। आईटीओ, रिंग रोड, मथुरा रोड, लाजपत नगर, कीर्ति नगर जैसे क्षेत्रों में पानी भर जाने से गाड़ियां बंपर-टू-बंपर चलती रहीं। कई जगहों पर दोपहिया वाहन बंद हो गए, और पैदल चलने वालों को कीचड़ व गंदे पानी में चलना पड़ा। लोगों ने सोशल मीडिया पर ट्रैफिक और जलभराव की तस्वीरें व वीडियो साझा करते हुए नगर निगम और सरकार को कोसा।

नोएडा और दिल्ली बॉर्डर पर हालात बेहद खराब

नोएडा और दिल्ली को जोड़ने वाले कालिंदी कुंज, डीएनडी फ्लाईओवर और महामाया फ्लाईओवर पर सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम देखा गया। सुबह ऑफिस टाइम में हजारों लोग घंटों जाम में फंसे रहे। नोएडा सेक्टर-18, सेक्टर-62 जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में जलभराव के कारण कामकाजी लोगों को भारी परेशानी हुई। जिन लोगों को जरूरी काम से बाहर निकलना पड़ा, वे भी घंटों सड़कों पर फंसे रहे।

जल निकासी पर उठे सवाल, मानसून से पहले की तैयारियों की खुली पोल

हर साल की तरह इस बार भी मानसून की पहली ही बारिश में दिल्ली-NCR की जल निकासी व्यवस्था की पोल खुल गई। गंदे नालों की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम की मरम्मत और जलभराव के पुराने बिंदुओं को ठीक करने के दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित नजर आए। लोगों का कहना है कि अगर 10-15 मिनट की बारिश में ही सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, तो पूरे मानसून में हालात कैसे होंगे?

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