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अमरनाथ यात्रा 2026: मुख्य सचिव अटल डुल्लू का निर्देश, संवेदनशील इलाकों में नहीं लगेंगे टेंट, स्वास्थ्य जांच अनिवार्य

Written by:Banshika Sharma
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जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए सुरक्षा उपायों को कड़ा कर दिया है। मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में हुई बैठक में यात्रा मार्गों पर आपदा-संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और वहां टेंट लगाने पर रोक लगाने का फैसला किया गया। साथ ही, सभी तीर्थयात्रियों के लिए RFID पंजीकरण और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा।
अमरनाथ यात्रा 2026: मुख्य सचिव अटल डुल्लू का निर्देश, संवेदनशील इलाकों में नहीं लगेंगे टेंट, स्वास्थ्य जांच अनिवार्य

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 2026 की अमरनाथ यात्रा को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने यात्रा के दोनों मार्गों पर संवेदनशील और जोखिम भरे इलाकों की पहचान करने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया कि इन चिह्नित क्षेत्रों में किसी भी तरह के टेंट या अस्थायी ढांचे लगाने की अनुमति नहीं होगी।

यह अहम फैसला बुधवार (28 जनवरी, 2026) को अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (SASB) की 15वीं उच्च-स्तरीय समिति की बैठक में लिया गया। प्रशासन का लक्ष्य यात्रा शुरू होने से काफी पहले सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। अमरनाथ यात्रा आमतौर पर जुलाई-अगस्त के महीने में होती है।

संवेदनशील क्षेत्रों में टेंट पर पाबंदी

मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने अनंतनाग और गांदरबल के उपायुक्तों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे यात्रा के दोनों पारंपरिक मार्गों पर आपदा की दृष्टि से कमजोर और जोखिम वाले हिस्सों को चिह्नित करें। यह निर्देश अनंतनाग जिले से होकर जाने वाले 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग, दोनों पर लागू होगा। फैसले के अनुसार, इन उच्च-जोखिम वाले इलाकों में श्रद्धालुओं या सेवा प्रदाताओं के लिए कोई भी सुविधा, जैसे टेंट या अस्थायी दुकान, स्थापित नहीं की जाएगी।

तैयारियों में तेजी लाने के निर्देश

बैठक में मुख्य सचिव ने अग्रिम योजना और समय पर काम पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने पर्यटन विभाग और लोक निर्माण विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे आगामी एक महीने के भीतर टेंडर, खरीद और अनुबंध से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर लें। उन्होंने कहा, “यात्रा शुरू होने से पहले एक निर्बाध व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कार्यों को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना अत्यंत आवश्यक है।” इसके अलावा, सेवा प्रदाताओं को भी सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य सुविधाओं और पंजीकरण पर विशेष जोर

इस साल स्वास्थ्य तैयारियों को भी एक प्रमुख प्राथमिकता के तौर पर देखा जा रहा है। चंदनवाड़ी और बालटाल स्थित बेस कैंप अस्पतालों में पर्याप्त मेडिकल स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके साथ ही, यात्रा मार्ग पर भी स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि केवल उन्हीं श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी जाएगी, जिनके पास RFID टैग और वैध स्वास्थ्य प्रमाण पत्र होगा। स्वास्थ्य विभाग को जरूरत पड़ने पर बाहरी क्षेत्रों से अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी कहा गया है।

श्राइन बोर्ड ने दिया तैयारियों का ब्योरा

बैठक के दौरान श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मनदीप कुमार भंडारी ने यात्रा की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा यात्रा ट्रैक को बेहतर बनाने का काम चल रहा है। इसके अलावा, बिजली और पानी की निर्बाध आपूर्ति, आपदा न्यूनीकरण के उपाय, प्रीपेड किराया प्रणाली, शिविरों की क्षमता बढ़ाना और मजदूरों व टट्टू सेवाओं के पंजीकरण से संबंधित व्यवस्थाओं पर भी प्रकाश डाला गया।