चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है और एक-एक कर चारों धामों के कपाट खोले जा रहे। गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के बाद अब गुरुवार सुबह 6:15 पर बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस तरह से चार धाम यात्रा नहीं पूर्णता प्राप्त कर लिया और श्रद्धालुओं का उत्साह भी बढ़ता हुआ देखा जा रहा है।
सुबह-सुबह पुनर्वसु नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में श्रद्धालुओं के लिए बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले गए। बुधवार को कलश यात्रा और देव डोलिया धाम पहुंच गई थी। इन्हें रात्रि भोग लगाने के बाद आज सुबह मंदिर के कपाट खोले गए।
बुधवार को पहुंच गई थी डोली
बुधवार सुबह पांडुकेश्वर में मौजूद योग ध्यान बद्री मंदिर में पूजा के बाद कलश यात्रा और देव डोलिया धाम के लिए रवाना की गई थी। यात्रा मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख पड़ावों पर श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ डोली का स्वागत किया। कुबेर जी के विग्रह को बामणी गांव स्थित नंदा देवी मंदिर और उद्धव जी के विग्रह को रावल निवास पर रुकवा कर रात्रि भोग लगाया गया।
अद्भुत है बद्रीनाथ की परंपरा
बद्रीनाथ मंदिर की परंपरा काफी अद्भुत है। शीतकाल के समय मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और ऐसी मान्यता है कि इस दौरान यहां देवता पूजा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि देवताओं की ओर से मुख्य पुजारी नारद जी होते हैं। आपका कपाट खोल दिए गए हैं तो यहां मानव पूजा अर्चना की जाएगी।
बैंड की धुन और सीएम ने की पूजा
बद्रीनाथ धाम के कपाट सेवा के बंद की मधुर ध्वनि और मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए हैं। जैसे ही मंदिर के कपाट खोले उस समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अन्य पदाधिकारी मौके पर मौजूद थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहले पूजा की।
इस दौरान हजारों श्रद्धालु मौके पर मौजूद थे और दर्शन के लिए आतुर नजर आ रहे थे। जैसे ही कपाट खोले गए हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान बद्री विशाल और अखंड ज्योति के दर्शन किए।
25 क्विंटल फूलों से सजा मंदिर
आज बद्री विशाल के कपाट खोले जाने का विशेष दिन था। इस उपलक्ष्य में मंदिर को 25 क्विंटल गेंदा के फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया। द्वारा के दोनों तरफ मोर की आकृति बनी हुई दिखाई दे रही थी। एक तरफ ॐ लक्ष्मीपति नमः तो दूसरी तरफ ॐ बैकुंठाय नामा लिखा हुआ था। इसके आसपास ॐ और स्वास्तिक जैसे चिन्ह भी बने हुए थे। हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।






