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इन शिक्षकों-कर्मियों को बड़ा झटका, मानदेय बढ़ोतरी पर लगी रोक, ये है कारण

Written by:Pooja Khodani
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अब चार फीसदी की वार्षिक बढ़ोतरी उनके मूल मानदेय के आधार पर होगी या वार्षिक बढ़ोतरी के बाद निर्धारित मानदेय के आधार पर इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा गया है।
इन शिक्षकों-कर्मियों को बड़ा झटका, मानदेय बढ़ोतरी पर लगी रोक, ये है कारण

Jharkhand Para Teachers : झारखंड के हजारों सहायक अध्यापक (पारा शिक्षक) के लिए बड़ी खबर है।शिक्षा विभाग ने जनवरी 2024 से होने वाले मानदेय में चार फीसदी की बढ़ोतरी पर फिलहाल रोक लगा दी है।जिलों को दिसंबर 2023 के आधार पर ही अगस्त महीने के मानदेय देने के निर्देश दिए गए है।

दरअसल, झारखंड सहायक अध्यापक सेवा शर्त नियमावली में शिक्षकों के मानदेय में प्रति वर्ष 4 फीसदी वृद्धि का प्रावधान है,इसके अनुरूप वर्ष 2023 व वर्ष 2024 में शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि की गई है। शिक्षकों के मानदेय में इस वर्ष जनवरी 2024 में बढ़ोतरी की गई थी, जिन शिक्षकों की मानदेय बढ़ोतरी की प्रक्रिया पूरी हो गयी थी एवं उन्हें बढ़ी हुई राशि के अनुरूप मानदेय का भुगतान किया गया था लेकिन अगस्त के मानदेय में उनकी भी बढ़ोतरी रोक दी गई।

वित्त विभाग को भेजा प्रस्ताव

अब चार फीसदी की वार्षिक बढ़ोतरी उनके मूल मानदेय के आधार पर होगी या वार्षिक बढ़ोतरी के बाद निर्धारित मानदेय के आधार पर इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा गया है।झारखंड शिक्षा परियोजना ने अब मानदेय बढ़ोतरी को लेकर मार्गदर्शन मांगा है। इस संबंध में प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है। वित्त विभाग के मार्गदर्शन के बाद बढ़ोतरी के अनुरूप राशि दी जायेगी।बता दे कि राज्य में 61 हजार पारा शिक्षक कार्यरत है।कक्षा 1 से 5 व  6 से 8 के लिए शिक्षकों के लिए अलग-अलग मानदेय निर्धारित है।

शिक्षकों में आक्रोश

पारा शिक्षकों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सहायक अध्यापकों का जनवरी 2024 से मिलने वाले 4 वार्षिक इंक्रीमेंट पर रोक लगा दी गई है।धनबाद, गुमला, जामताड़ा, बोकारो, हजारीबाग समेत कई जिलों के प्रखंड लेखापाल ने आकलन उत्तीर्ण सहायक अध्यापकों की 10 मानदेय वृद्धि भी रोक दी है।सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा का भी कहना है कि जल्द ही शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव, परियोजना निदेशक से मिलकर हर माह में पांच तारीख तक भुगतान कराने की मांग करेंगे।

 

Pooja Khodani
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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 9 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani
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