बिहार विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर एक बड़ा दांव खेला है। गुरुवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह ऐलान किया गया, जिसके साथ ही महागठबंधन के सीएम चेहरे को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो गया। सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी को सीएम फेस बनाने के लिए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभाई। इस फैसले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत की मध्यस्थता ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
लालू यादव ने तेजस्वी को सीएम फेस घोषित करवाने के लिए रणनीतिक तौर पर मोर्चा संभाला था। कुछ दिन पहले कांग्रेस ने अशोक गहलोत को पटना भेजा था ताकि महागठबंधन के दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाया जा सके। गहलोत ने लालू और तेजस्वी से मुलाकात कर सहमति बनाई और कांग्रेस को तेजस्वी के नाम पर राजी किया। सूत्रों के मुताबिक, लालू के साथ लंबे समय से चले आ रहे भरोसेमंद रिश्ते के कारण कांग्रेस ने इस फैसले का समर्थन किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम चेहरे की घोषणा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गहलोत ने घोषणा की कि राहुल गांधी भी तेजस्वी को सीएम फेस के रूप में देखना चाहते थे। इसके साथ ही महागठबंधन ने मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। सहनी के नाम पर भी सहमति बनने से महागठबंधन ने एकजुटता का संदेश दिया है। हालांकि, कुछ सीटों पर अभी भी विवाद बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि दोनों दल जल्द ही इसका समाधान निकाल लेंगे।
राज्य की सियासत में नया मोड़
तेजस्वी के सीएम फेस बनने के बाद अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सामने अपने सीएम चेहरे को लेकर चुनौती बढ़ गई है। तेजस्वी ने अपने नाम की घोषणा के बाद बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह नीतीश कुमार को उचित सम्मान नहीं दे रही है। महागठबंधन अब पूरी ताकत के साथ बिहार चुनाव में उतरने की तैयारी में है, और यह फैसला राज्य की सियासत में नया मोड़ ला सकता है।





