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PM Modi बोले BJP हमारी मां, स्थापना दिवस राजनीतिक आयोजन नहीं, कार्यकर्ताओं के लिए भावुक अवसर, मिशन अभी जारी है

Written by:Atul Saxena
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आज भाजपा जिस शिखर पर है, उसकी चमक सबको दिखती है, लेकिन यहां तक पहुंचने में लाखों कार्यकर्ताओं का जो श्रम है, उन्होंने तप, त्याग की पराकाष्ठा की है, ये वही जान सकता है, जो इस पार्टी के संकल्पों के लिए समर्पित होकर स्वयं इस साधना का हिस्सा रहा है।
PM Modi बोले BJP हमारी मां, स्थापना दिवस राजनीतिक आयोजन नहीं, कार्यकर्ताओं के लिए भावुक अवसर, मिशन अभी जारी है

PM Modi BJP Foundation Day

भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज अपना 47वां स्थापना दिवस मना रहा है, पार्टी मुख्यालय नई दिल्ली सहित देश भर में कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि भाजपा एकमात्र ऐसा राजनीतिक दल है, जहां हम पार्टी को अपनी मां मानते हैं। इसलिए पार्टी का स्थापना दिवस केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं होता है। ये हम सब कार्यकर्ताओं के लिए एक भावुक अवसर होता है।

मोदी ने कहा- ये दिन हमें पार्टी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का मौका देता है कि पार्टी ने हमें राष्ट्रसेवा का सौभाग्य दिया। मैं देशभर के करोड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं और भाजपा को समर्थन करने वाले मेरे देश के सभी नागरिकों को भाजपा स्थापना दिवस की बहुत बहुत बधाई देता हूं।

प्रधानमंत्री ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की तारीफ करते हुए कहा, मैं इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए हमारे अध्यक्ष नितिन नबीन को विशेष धन्यवाद देता हूँ। उनके अध्यक्ष बनने के बाद यह पार्टी का पहला स्थापना दिवस है। इस समय, जिन पाँच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वहाँ पार्टी में एक नई ऊर्जा दिखाई दे रही है। ऐसा लगता है कि नबीन जी ने पार्टी में नई ऊर्जा ताजगी और नवीनता  भर दी है।

पीएम ने कहा भाजपा कार्यकर्ता जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने में कभी संकोच नहीं करते। उन्हें दृढ़ विश्वास था कि उनकी मेहनत से भारत का भविष्य बेहतर बनेगा। इसीलिए कार्यकर्ताओं ने आपातकाल से लेकर कांग्रेस शासन के दौरान हुए दमन तक हर कठिनाई का सामना किया। कई कार्यकर्ताओं ने तो अपने प्राणों की आहुति भी दे दी। हमने इसे बंगाल जैसे राज्यों में देखा है, जहाँ हिंसा को राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बना लिया गया है।

भाजपा एक सशक्त कैडर आधारित पार्टी

मोदी ने कहा- राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विशाल और पवित्र वट वृक्ष के नीचे हमें साफ नीयत के साथ सुचिता के साथ राजनीति में कदम रखने की प्रेरणा मिली। फिर शुरुआत के कुछ दशकों में हमने संगठन के लिए नीतियां निर्धारित करने में अपनी ऊर्जा लगाई। उसके बाद जो समय आया जब भाजपा ने पूरी निष्ठा के साथ खुद को एक सशक्त कैडर आधारित पार्टी बनाने में झोंक दिया। हमने कार्यकर्ताओं का ऐसा विशाल कैडर खड़ा किया, जिनमें सेवा भावना से काम करने का समर्पण था, जिन्होंने पार्टी के सिद्धांतों को अपने जीवन का आदर्श बनाया और जिन्होंने किसी भी परिस्थिति में अपने मूल्यों से समझौता स्वीकार नहीं किया।

भाजपा पर देशवासियों का भरोसा बढ़ता रहा

हम 1984 का वह दौर भूल नहीं सकते जब कांग्रेस ने रिकॉर्ड सीटें जीतीं लेकिन देश की जनता देख रही थी कि कैसे कांग्रेस सत्ता हासिल करके उसके साथ विश्वासघात कर रही है। ऐसे में भाजपा पर देशवासियों का भरोसा बढ़ता रहा और भाजपा धीरे धीरे चुनाव जीतने लगी। हमारे आने से देश की राजनीति में दो धाराएं स्पष्ट हो गईं। एक धारा बनी सत्ता आधारित राजनीति तो दूसरी धारा बनी सेवा आधारित राजनीति। सत्ता को प्राथमिकता देने वाली राजनीति का धीरे धीरे पतन होने लगा और सेवा आधारित राजनीति को धीरे धीरे लोगों का भारी समर्थन मिलने लगा।

याद दिलाया, यूनिफॉर्म सिविल कोड, वन नेशन वन इलेक्शन

उन्होंने कहा-  देश जानता है, हर चुनौती का सामना करने के लिए भाजपा ईमानदारी से कोशिश कर रही है, आगे भी करेगी। पहले भी सकारात्मक नतीजे मिले हैं और आगे भी मिलेंगे। अंग्रेजों के दौर के सैकड़ों काले कानूनों का अंत, लोकतंत्र के लिए नए संसद भवन का निर्माण, सामान्य समाज के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, कानून बनाकर तीन तलाक पर रोक, सीएए, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण… ऐसे कितने ही काम हैं, जो भाजपा के ईमानदार प्रयासों का नतीजा है और हमारा मिशन अभी भी जारी है। यूनिफॉर्म सिविल कोड, वन नेशन वन इलेक्शन ऐसे सभी विषयों पर आज देश में एक गंभीर चर्चा हो रही है।

 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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