चुनावी मौसम में राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर है और अब एक 45 साल पुराना विवाद फिर से सियासत के केंद्र में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर आरोप लगाया है कि उनका नाम 1980 में मतदाता सूची में दर्ज किया गया था, जबकि उस समय वे भारतीय नागरिक भी नहीं थीं। बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि 1980 से 1982 के बीच सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में जोड़ा गया। उन्होंने कहा, “मतदाता बनने के लिए भारतीय नागरिकता अनिवार्य है, लेकिन कांग्रेस ने इस नियम का खुला उल्लंघन किया।”
अमित मालवीय के सबूत और आरोप
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर 1980 की मतदाता सूची का एक अंश साझा किया। उन्होंने इसे “घोर चुनावी कदाचार” बताते हुए लिखा कि- “सोनिया गांधी का जन्म 1946 में इटली में हुआ था। 1968 में उनकी शादी राजीव गांधी से हुई, लेकिन भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही उन्हें मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया। यह साफ तौर पर कानून का उल्लंघन है।” मालवीय ने आगे दावा किया कि 1983 में नागरिकता मिलने के बाद भी, अंतिम तारीख निकल जाने के बावजूद, उनका नाम सूची में जोड़ा गया, जो चुनावी नियमों के खिलाफ था। 1982 में भारी विरोध के बाद उनका नाम हटाया गया।
कांग्रेस का पलटवार- “ध्यान भटकाने का प्रयास”
कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि यह 45 साल पुराना मामला है, जिसे अब उठाकर बीजेपी मौजूदा और अहम चुनावी मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि असली मुद्दा आज की मतदाता सूची में हो रही कथित धांधली है, जिस पर जवाब देने के बजाय बीजेपी पुराने मामलों में उलझा रही है।
विपक्ष के ताजा आरोप
बीते कुछ महीनों में विपक्षी दलों ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कर्नाटक के महादेवपुरा में एक ही कमरे से 80 वोट समेत 1.02 लाख फर्जी वोट पाए जाने का दावा, महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में हार के बाद कुछ महीनों में मतदाता सूची में 1 करोड़ से अधिक नए नाम जुड़ने का आरोप, बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के नाम पर विपक्षी मतदाताओं को सूची से हटाने की साजिश का आरोप, मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि ये घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला हैं।
चुनाव आयोग का जवाब
चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े सभी कार्य पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से किए जाते हैं। आयोग ने राहुल गांधी और अन्य नेताओं से कहा है कि वे अपने दावों को शपथपत्र में दर्ज करें और ठोस सबूत पेश करें।
सुप्रीम कोर्ट में पुराना संदर्भ
चुनाव आयोग ने 2018 में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की एक याचिका का हवाला देते हुए कांग्रेस पर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया था। आयोग का कहना है कि विपक्ष कई बार तथ्यहीन आरोप लगाकर संस्थानों की साख को नुकसान पहुंचाता है।
सियासी बयानबाजी तेज
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस “बिहार चुनाव से पहले हार का बहाना” ढूंढ रही है। वहीं अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर “झूठ बोलने और गलत आंकड़े देने” का आरोप लगाया। कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया में कहा गया कि बीजेपी चुनावी बहस में असफल हो रही है और जनता को भ्रमित करने के लिए 40-45 साल पुराने मामलों को फिर से उछाल रही है। यह मामला दिखाता है कि कैसे चुनावी राजनीति में पुराने आरोप भी फिर से जिंदा कर दिए जाते हैं, खासकर जब माहौल गर्म हो और दांव बड़ा हो। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 1980 के इस विवाद का मौजूदा चुनावी माहौल पर कितना असर पड़ता है और मतदाता इसे किस नजर से देखते हैं।





