बॉम्बे हाई कोर्ट ने एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार रमेश गायचोर को उनके 75 वर्षीय बीमार पिता से मिलने के लिए तीन दिन की अस्थायी जमानत मंजूर की है। गायचोर सितंबर 2020 से हिरासत में हैं। उनको अपने पिता से चार साल से अधिक समय बाद मिलने का अवसर मिलेगा। कोर्ट ने तलोजा सेंट्रल जेल में 25,000 रुपये की नकद जमानत और बॉन्ड के साथ उनकी रिहाई का आदेश दिया। गायचोर के वकीलों ने उनके साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए एस्कॉर्ट शुल्क माफ करने की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
कोर्ट ने अतिरिक्त सरकारी वकील मंकुवार देशमुख को निर्देश दिया कि वे नवी मुंबई पुलिस आयुक्त को 9 सितंबर से गायचोर के पिता के साथ रहने के दौरान एस्कॉर्ट प्रदान करने की सूचना दें। गायचोर के पिता, जो एक सेवानिवृत्त सुरक्षा गार्ड हैं, उम्र से संबंधित बीमारियों से पीड़ित हैं और हाल ही में पुणे में अस्पताल में भर्ती थे। गायचोर के वकीलों मिहिर देसाई, संस्कृति याग्निक और दीपा पंजानी ने तर्क दिया कि उनके पिता को देखभाल की जरूरत है, जिसे कोर्ट ने ध्यान में रखा।
जमानत याचिका का विरोध
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से विशेष सरकारी वकील संदेश पाटिल और वकील चिंतन शाह ने जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि गायचोर की मेरिट पर जमानत याचिका पहले से ही लंबित है। हालांकि, उन्होंने पिता के हाल के अस्पताल में भर्ती होने के मेडिकल रिकॉर्ड की प्रामाणिकता को स्वीकार किया। इससे पहले, जुलाई में जब गायचोर के पिता अस्पताल में भर्ती थे तब ट्रायल कोर्ट ने उनकी अस्थायी जमानत की याचिका खारिज कर दी थी।
पुलिस का क्या दावा
एल्गार परिषद मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में दिए गए भाषणों से संबंधित है, जिसके बारे में पुलिस का दावा है कि अगले दिन भिमा कोरेगांव युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की थी। गायचोर उन 16 कार्यकर्ताओं में शामिल हैं जिन पर इस मामले में आरोप लगाए गए हैं। हाई कोर्ट ने उनके पिता की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर यह फैसला सुनाया।






