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बुद्ध पूर्णिमा: समय के साथ और प्रासंगिक हो रहे हैं बुद्ध, करूणा, शांति और अहिंसा का संकल्प लेने का दिन

Written by:Shruty Kushwaha
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बुद्ध पूर्णिमा सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि ये मानवता का संदेश देने वाला दिन है। आज के समय में जब विश्व तनाव और कई तरह के संघर्षों से जूझ रहा है..गौतम बुद्ध के सिद्धांत और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। इस दिन बौद्ध धर्म के अनुयायी दान पुण्य, ध्यान और नैतिक जीवन जीने का संकल्प लेते हैं। भारत में बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर जैसे स्थानों पर लाखों श्रद्धालु एकत्रित होकर तथागत की शिक्षा का स्मरण करते हैं। 
बुद्ध पूर्णिमा: समय के साथ और प्रासंगिक हो रहे हैं बुद्ध, करूणा, शांति और अहिंसा का संकल्प लेने का दिन

Buddha Purnima : आज बुद्ध पूर्णिमा है। भारत के अलावा श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, जापान, चीन, कोरिया, नेपाल, भूटान सहित कई देशों में बुद्ध पूर्णिमा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। अलग अलग देशों में बुद्ध पूर्णिमा को विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है लेकिन सबके मूल में शांति, करुणा का संदेश और गौतम बुद्ध के उपदेशों का पालन होता है।

आज के दिन सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शुभकामनाएं देते हुए लिखा है कि ‘बुद्ध पूर्णिमा की प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। विश्व को शांति, अहिंसा एवं त्याग की दिशा दिखाकर मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाले भगवान बुद्ध जी के संदेश अनंतकाल तक हमें प्रेरणा देते रहेंगे। आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं।’

बुद्ध पूर्णिमा आज 

बुद्ध पूर्णिमा का पर्व बैसाख माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। आज ही के दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, उन्हें ज्ञान प्राप्ति हुई थी और महापरिनिर्वाण भी हुआ था। ये पर्व बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए विशेष महत्व रखता है। भारत सहित दुनिया के अलग अलग देशों में मंदिरों में विशेष प्रार्थनाएं, ध्यान सत्र और दान-पुण्य के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

वेसाक दिवस के रूप में मिली मान्यता

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 दिसंबर 1999 को बुद्ध पूर्णिमा  “वेसाक दिवस” (Day of Vesak) के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी। यह दिन गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की स्मृति में मनाया जाता है। ये निर्णय बौद्ध धर्म की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिए लिया गया, जिसका प्रस्ताव श्रीलंका ने रखा था। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय और अन्य कार्यालयों में प्रार्थनाएं, सांस्कृतिक प्रदर्शन और शांति सभाएं आयोजित की जाती हैं। ये दिन विश्व स्तर पर गौतम बुद्ध के अहिंसा और मध्यम मार्ग के सिद्धांतों को बढ़ावा देता है।

भारत में श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है बुद्ध पूर्णिमा

भारत में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर और लुम्बिनी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। बोधगया में महाबोधि मंदिर परिसर में विशेष पूजा, ध्यान और प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं, सारनाथ में वो स्थान विशेष श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के पश्चात पहला उपदेश दिया था। संयुक्त राष्ट्र द्वारा भी इस दिन को अंतरराष्ट्रीय धरोहर दिवस (International Vesak Day) के रूप में मान्यता दी गई है, जिसे कई देशों में राजकीय पर्व के रूप में मनाया गया।

आज के समय और प्रासंगिक हुए गौतम बुद्ध

गौतम बुद्ध का मूल नाम सिद्धार्थ गौतम था। उनका का जन्म नेपाल के लुंबिनी में हुआ था। राजकुमार के रूप में पले-बढ़े सिद्धार्थ ने सांसारिक सुखों को त्यागकर 29 वर्ष की आयु में सत्य की खोज में अपना घर छोड़ दिया। छह वर्षों की कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में बोधगया में पीपल वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्ति हुई। इसके बाद, उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से विश्व को अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का संदेश दिया। 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ। गौतम बुद्ध का जीवन करुणा, त्याग और आत्मज्ञान का उदाहरण है। उन्होंने विश्वशांति और एकता का संदेश दिया जो आज के संदर्भ में और अधिक महत्वपूर्ण है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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