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CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर उठे सवाल, केसी वेणुगोपाल ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग, जानें पूरा मामला

Written by:Shyam Dwivedi
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सीबीएसई की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली OSM पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में है; कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने पीएम मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

देशभर में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की बोर्ड परीक्षाओं से जुड़ा एक बड़ा विवाद गहरा गया है, जहां लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और उनकी उच्च शिक्षा के अवसरों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि कई जगहों से भारी गड़बड़ियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसी गंभीर स्थिति के बीच संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने सीबीएसई की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) पर सीधे तौर पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इस प्रणाली को छात्रों के लिए एक बड़ा संकट बताया है।

वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री से इस पूरे मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है, ताकि एक बार के लिए समयबद्ध समाधान लागू किया जा सके और कोई भी छात्र अपने उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित न रह जाए, जो इस कथित प्रशासनिक विफलता का सीधा परिणाम है। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि ओएसएम सिस्टम में सामने आई कथित खामियों ने छात्रों के उच्च शिक्षा के अवसरों को खतरे में डाल दिया है, जिसे उन्होंने एक गंभीर प्रशासनिक विफलता करार दिया है और यह भी बताया है कि परीक्षा परिणामों से असंतुष्ट छात्र अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं, जो मौजूदा स्थिति की भयावहता को साफ दर्शाता है।

फिजिक्स की कॉपी में मिला दूसरे का लेखन

इस बीच सामने आए एक चौंकाने वाले उदाहरण ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जहां एक छात्र ने अपनी भौतिकी (फिजिक्स) की उत्तर पुस्तिका में ऐसा लेखन पाया है जो उसका अपना नहीं था, जिससे यह आशंका गहरी हो गई है कि उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान या स्कैनिंग की प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि हुई है और छात्रों की मेहनत पर पानी फिर गया है। इस घटना को सार्वजनिक करने के बाद संबंधित छात्र को सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना और दुर्व्यवहार का भी सामना करना पड़ा है, जिसने इस पूरे विवाद को एक नया और चिंताजनक आयाम दे दिया है, जिससे छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है।

पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी मांगने की अंतिम तिथि बीते मध्यरात्रि समाप्त हो चुकी है, जबकि पुनर्मूल्यांकन की अंतिम तारीख 29 मई के बेहद करीब है, इस वजह से छात्रों में भारी तनाव और चिंता का माहौल बना हुआ है क्योंकि इस कम समय सीमा में सुधार की प्रक्रिया को पूरा करना बेहद मुश्किल हो सकता है और उनके भविष्य पर अनिश्चितता का बादल मंडरा रहा है। इसके अतिरिक्त, परिणाम सत्यापन पोर्टल लगातार क्रैश हो रहा है, जिससे छात्रों को अपनी स्थिति जांचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं कई छात्रों ने यह शिकायत भी दर्ज की है कि रिवैल्यूएशन के लिए सिस्टम में ₹28,000 से लेकर ₹2,69,420 तक की मनमानी फीस दिखाई दे रही है, यह चौंकाने वाली स्थिति छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश और भ्रम पैदा कर रही है।

अलग-अलग प्रश्नपत्रों की कठिनाई पर उठे सवाल, ग्रेस मार्क्स नीति की मांग

वेणुगोपाल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि अलग-अलग प्रश्नपत्र सेटों की कठिनाई में असमानता के कारण कई छात्रों को अनुचित नुकसान हुआ है, जिससे उनके अंकों में भारी अंतर आया है, इसलिए उन्होंने छात्रों के हित में एक समान ग्रेस मार्क्स नीति लागू करने की पुरजोर मांग की है, ताकि सभी छात्रों के साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित किया जा सके। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि छात्रों को एक प्रणालीगत विफलता की वजह से आर्थिक, शैक्षणिक और मानसिक दबाव झेलना पड़ रहा है, और उन्होंने जोर देकर कहा है कि यह स्थिति किसी भी छात्र के साथ घोर अन्याय है, जिसके लिए तत्काल और प्रभावी समाधान की आवश्यकता है ताकि लाखों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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