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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका,महाराष्ट् में चल रही SIR रोकने की मांग, प्रशासनिक आदेशों को चुनौती

याचिकाकर्ताओं ने मतदाता पंजीकरण, मतदाताओं के नाम हटाने, मतदाता सूची के डेटाबेस, ERO की कार्यप्रणाली और ECI Net प्रणाली से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं।
Gyanesh Kumar

Gyanesh Kumar

पिछले दो दिनों से चर्चा में चल रहे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) के फैसलों से जुड़ा मामला अब न्यायालय पहुंच गया है, बॉम्बे हाई कोर्ट में उनके खिलाफ एक याचिका दायर की गई है जिसमें महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग की गई है साथ ही चुनाव आयोग द्वारा लिए गए 14 प्रशासनिक फैसलों को भी चुनौती दी गई है।

बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच में मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में लिए गए फैसलों और महाराष्ट्र में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के विरुद्ध एक याचिका प्रस्तुत की गई है, ये याचिका चार याचिकाकर्ता प्रथमेश गोपाल गवाणकर, गौरव सूर्यकांत नाखरेकर, आदेश शशिकांत भाटकर और स्मिताली निलेश नार्वेकर द्वारा दाखिल की गई है।

याचिका में उठाये गए ये सवाल 

याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग द्वारा लिए गए 14 प्रशासनिक फैसलों को रद्द करने और महाराष्ट्र में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को रोकने साथ ही इस दौरान हटाये गए मतदाताओं के नाम वापस मतदाता सूची में जोड़ने की मांग की गई है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दो चुनाव आयुक्तों द्वारा चुनाव आयोग के फैसले सामूहिक रूप से लिए गए थे या नहीं इस पर भी सवाल उठाया गया है। याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर उठाए गए इन सवालों पर हाई कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

मीडिया की खबर के बाद मचा बवाल 

गौरतलब है कि हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर ने खुलासा किया कि चुनाव आयोग के अन्दर मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों को लेकर मतभेद हैं, आयोग में उनके साथ मौजूद चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ज्ञानेश कुमार के कई फैसलों को लेकर नाखुश हैं, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निर्णयों पर पिछले 10 महीनों में कैबिनेट सचिव से 14 बार शिकायत की है, इस निर्णयों में SIR प्रक्रिया, नीतिगत निर्णय, फॉर्म 6 में बदलाव जैसे मुद्दे हैं, उनके द्वारा कथित तौर पर कहा गया कि ये फैसले और आदेश उनकी सहमति के बिना लिए गए हैं, इस खबर में आने के बाद से राहुल गांधी सहित समूचा विपक्ष CEC पर हमलावर है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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