चारधाम यात्रा 2023: श्रद्धालुओं को मिलेगी मोबाइल ATM की सुविधा, बदल गए VIP दर्शन के नियम, स्थानीय लोगों को मिली छूट

Chardham Yatra 2023

Chardham Yatra 2023: 22 अप्रैल से चार धाम यात्रा की शुरुआत होने जा रही है। जिसके लिए तैयारियां भी जोरों-शोरों से चल रही है। राज्य सरकार से लेकर मंदिर प्रशासन इस कार्य में जुटे हुए हैं। इस वर्ष श्रद्धालुओं को कई नई सुविधाओं का लाभ मिलेगा। वहीं कई नियमों में बदलाव भी नजर आ सकता है। वीआईपी दर्शन के नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है। वहीं राज्य सरकार ने स्थानीय लोगों को पंजीकरण पर छूट दी है।

मिलेगी मोबाइल एटीएम की सुविधा

मंगलवार को आयोजित हुई 84वें राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक अपर मुख्य सचिव आनंद बर्ध्मान की अध्यक्षता में आयोजित हुई है। इस दौरान कई अहम निर्णय लिए गए। केदारनाथ और यमुनोत्री में एटीएम और मोबाइल एटीएम स्थापित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही चारधाम यात्रा के मार्गों पर बैंक के ब्रांच और एटीएम की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

वीआईपी दर्शन के नियमों में बदलाव

पहली बार चार धाम यात्रा के दौरान वीआईपी दर्शन के लिए शुल्क देना होगा। यह फैसला मंदिर समिति की बैठक द्वारा लिया गया है। बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में वीआईपी दर्शन करने के लिए 300 रुपये शुल्क का भुगतान करना होगा। नियमों के तहत वीआईपी को संभालने की जिम्मेदारी बीकेटीसी कर्मचारियों की होगी। वहीं प्रसाद वितरण का कार्य भी उनके द्वारा ही किया जाएगा। 25 अप्रैल से केदारनाथ और 27 अप्रैल से बदरीनाथ के द्वार खुल रहे हैं।

स्थानीय लोगों को मिली पंजीकरण से छूट

मंगलवार को उतराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थानीय लोगों के लिए पंजीकरण की अनिवार्यता को खत्म करने का निर्देश जारी किया है। धामों के पुरोहित और लोग लंबे समय से इस बात की मांग कर रहे थे। बताया दें कि 22 अप्रैल से गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुल रहे हैं।

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
Follow Us :GoogleNews