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CJP Protest: सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर्ड कमेटी में बदलाव से किया इंकार, तय किये प्राथमिक जांच बिंदु

सुप्रीम कोर्ट ने जांच से जुड़े गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं, अदालत ने HPEC को आदेश दिया कि ऐसे गवाह जिन पर दबाव, डराने-धमकाने या प्रताड़ना की आशंका है, उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए।
Supreme Court CJP HPEC Order

Supreme Court CJP HPEC Order

NEET परीक्षा के विरोध में दिल्ली के जंतर मंतर पर CJP और देश के अन्य हिस्सों में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए बनी हाई पावर्ड जांच कमेटी (HPEC) में बदलाव की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। बदलाव की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा जांच कमेटी के कुछ सदस्यों की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अनुमान और कल्पना पर आधारित हैं, उनके पीछे कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है।

दो महीने पूर्व जुलाई में दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट परीक्षा पेपर आउट के विरोध में धरना प्रदर्शन किया था, 20 जुलाई को संसद के घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने बल का प्रयोग किया, इस दौरान हिंसा हुई, पत्थर चले, पैलेट गन से छात्र घायल हुए। पुलिस बर्बरता का मामला कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने संसद में उठाया, इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई जिसपर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में बनी है 5 सदस्यीय  HPEC

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है, इसमें CJI के अलावा जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं , पिछले दिनों इस बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कमेटी बनाई थी, इस कमेटी को पूरे घटनाक्रम, पुलिस अधिकारियों की भूमिका और संपत्ति को हुए नुकसान की जांच करनी है, लेकिन कमेटी के सदस्यों को लेकर वरिष्ठ वकील ने सवाल उठाये हैं।

प्रशांत भूषण ने दोबारा समिति बनाने की उठाई थी मांग

10 सितंबर को हुई मामले की पिछली सुनवाई में वकील प्रशांत भूषण ने कमेटी के सदस्य बनाये गए पूर्व डीजीपी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे, उनका कहना था कि पूर्व डीजीपी कुछ ऐसे मौजूद अधिकारियों के करीबी हैं, जो जांच के दायरे में है इसलिए, उनकी मौजूदगी से से निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है इसलिए इस कमेटी का पुनर्गठन किया जाये,  सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा हमें काफी सोच-विचार के बाद कमेटी का गठन किया है, इसलिए इसमें बदलाव नहीं होगा अदालत ने कहा बिना किसी ठोस आधार के किसी अनुमान के चलते किसी की निष्पक्षता पर सवाल उठाना सही नहीं है कमेटी को उसका काम करने देना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच का दायरा निर्धारित किया 

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और उससे जुड़े आरोपों की जांच के लिए गठित हाई पावर्ड एनक्वायरी कमेटी (HPEC) के जांच दायरे को स्पष्ट कर दिया है। 10 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद जारी विस्तृत आदेश में अदालत ने कमेटी के लिए जांच के प्राथमिक बिंदु निर्धारित किए हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि HPEC पहले चरण में चार प्रमुख आरोपों की तथ्यात्मक जांच करेगी। जांच कमेटी प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाकर की गई हिंसा एवं उत्पीड़न, पुलिसकर्मियों को लगी चोटों तथा दोनों पक्षों की ओर से हुई हिंसा और सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को हुए नुकसान से जुड़े आरोपों की जांच करेगी।

संवैधानिक मुद्दों पर फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि HPEC की भूमिका मुख्य रूप से तथ्यात्मक आरोपों की जांच करने और अदालत की सहायता करने तक सीमित रहेगी। कमेटी संवैधानिक प्रश्नों पर अंतिम निर्णय नहीं देगी। अदालत ने प्रदर्शन के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा फेशियल रिकग्निशन तकनीक के कथित इस्तेमाल और नागरिक अधिकारों से जुड़े व्यापक संवैधानिक सवालों को अलग रखा है। इन मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट स्वयं विचार करेगा।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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