पन्ना में ग्रामीणों का अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। यहां के अजयगढ़ इलाके में केन बेतवा लिंक परियोजना सहित सिंगरौली ललितपुर रेलवे लाइन, मझगाय और रूंझ बांध परियोजना के परिवार ऐसे हैं जिन्हें विस्थापित किया गया है।
दरअसल परियोजनाओं की वजह से जलस्तर बढ़ने की वजह से कईं गांव डूब गए हैं। ऐसे में लोगों को अपने घर छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा है। अब यही ग्रामीण लकड़ी पर सांकेतिक चिता लगाकर जल सत्याग्रह कर अपने लिए न्याय मांग रहे हैं।
ग्रामीण कर रहे चिता आंदोलन
ग्रामीणों का आंदोलन 12 सितंबर से शुरू हुआ है। मझगाय बांध में बढ़ते जल स्तर के बीच इस आंदोलन को शुरू किया गया। 13 सितंबर को इस आंदोलन का दूसरा दिन था जब ग्रामीणों ने बिजली काटकर उन पर आंदोलन खत्म करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि तीन दिन से क्षेत्र की बिजली बंद है। 14 सितंबर को आंदोलन के तीसरे दिन महिलाओं और आदिवासी पुरुषों को सांकेतिक फांसी लगाकर विरोध जताते हुए देखा गया। 15 सितंबर को यह लगातार अपनी मांगों पर पड़े रहे और आंदोलन करते रहे। 16 सितंबर को आज आंदोलन का पांचवा दिन है। यहां ग्रामीणों को पानी के ऊपर चिता बनाकर उसपर लेट कर न्याय दो या मार दो के नारे लगाते हुए देखा गया।
ग्रामीणों के क्या आरोप
आंदोलन कर रहे इन ग्रामीणों ने यह आरोप लगाया है कि विकास के नाम पर उनके अधिकारों को अनदेखा कर दिया गया है। बालूपुर, कुंवरपुर, विश्रामगंज और बनेहरी गांव डूब चुके हैं। कई मकान ढह गए हैं। किसानों की खेती पूरी तरह से बर्बाद हो गई। किसानों का कहना है कि बिना सहमति के उनकी जमीन कब्जा ली गई है और विरोध किया तो उन पर कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं उपजाऊ जमीन को राजस्व के रिकॉर्ड में असिंचित दर्ज कर दिया गया है। जिससे उन्हें मुआवजे में नुकसान झेलना पड़ा।
क्या है मांग
बता दें कि पुनर्वास का पैकेज पहले 5 लाख था लेकिन विरोध को देखते हुए इसे 12 लाख 50 हजार प्रति परिवार करने की घोषणा की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि घोषणा कर दी गई है इसके बावजूद भी कुछ परिवारों को अब तक नया पैकेज नहीं दिया गया है। दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि पात्र परिवार को नियमों के मुताबिक पर पुनर्वास राशि का भुगतान किया गया है। इसमें विश्रामगंज के 670, बालूपुर, बनेहरि और कुंवरपुर के 1219 परिवार शामिल है।
प्रशासन द्वारा यह भी कहा गया है कि जिन लोगों को 5 लाख दिया जा चुके हैं। नियमों के तहत उन्हें अतिरिक्त 7 लाख 50 हजार का भुगतान भी किया जाएगा। एसडीएम का कहना है कि ग्रामीण शपथ पत्र, लिखित सहमति और बैंक खाते की जानकारी जमा कर देंगे तो सीधे उनके बैंक खाते में राशि भेज दी जाएगी।






