पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे सीएम योगी आदित्यनाथ

पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे सीएम योगी आदित्यनाथ

नई दिल्ली| उत्तर प्रदेश (UTTAR PRADESH)के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (YOGI ADITYANATH) के पिता आनंद सिंह बिष्ट का दिल्ली एम्स में निधन हो गया। 89 साल के आनंद सिंह बिष्ट का दिल्ली के एम्स में इलाज चल रहा था और उनकी हालत गंभीर थी| वह पिछले कई दिनों से वेंटिलेटर पर थे और उन्होंने आज यानी सोमवार सुबह 10 बजकर 40 मिनट पर अंतिम सांस ली| योगी आदित्यनाथ अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे।

पिता के निधन पर सीएम योगी (CM YOGI) ने एक खत लिखा| उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ जारी लड़ाई के कारण मैं अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाऊंगा| लॉकडाउन के बाद दर्शनार्थ जाऊंगा| उन्होंने लिखा ‘अपने पूज्य पिताजी के कैलाशवासी होने पर मुझे भारी दुख एवं शोक है। वे मेरे पूर्वाश्रम के जन्मदाता हैं, जीवन में ईमानदारी, कठोर एवं निस्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिए समर्पित भाव के साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया। अंतिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी परंतु वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ देश की लड़ाई तो उत्तर प्रदेश की 23 करोड़ जनता के हित में आगे बढ़ाने का कर्तव्यबोध के कारण मैं अंतिम दर्शन न कर सका. कल 21 अप्रैल को लॉकडाउन के कारण अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले पाऊंगा’

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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