नई दिल्ली: संसद में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव एक बार फिर बढ़ गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मोदी सरकार ने ठान लिया है कि वह दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष को बोलने का मौका नहीं देगी। इसी के विरोध में आज राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के दौरान विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
खरगे ने सरकार के रवैये की कड़ी निंदा की और कहा कि यह लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को पिछले चार दिनों से बोलने नहीं दिया जा रहा है। जब देश के लिए कुर्बानी देने वाले नेताओं का सदन में अपमान किया जाता है और सरकार चुप रहती है, तो विपक्ष के पास विरोध करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
‘सरकार ने दोनों सदनों में विपक्ष को चुप कराने की ठान ली है’
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ने यह तय कर लिया है कि विपक्ष की आवाज को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाए। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि सत्ता पक्ष ने ठान लिया है कि दोनों सदनों के नेता विपक्षों को बोलने नहीं देना है। ना लोकसभा में और ना राज्यसभा में। अगर मेरी बात सुनी जाती तो ये समस्या खत्म हो सकती थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।”
खरगे ने आगे कहा कि सभी विपक्षी दलों ने मिलकर यह फैसला किया था कि अगर सरकार उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं देगी तो वे सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे।
“हमारे बड़े-बड़े नेता, जिन्होंने इस देश के लिए कुर्बानी दी, जेलों में गए और अंग्रेजों के खिलाफ लड़कर देश को आज़ादी दिलाई, उन नेताओं के खिलाफ एक आदमी सदन में बोलता है। उसे माइक दिया जाता है, वह मनमानी गालियां देता है और सरकार वाले चुप्पी साध लेते हैं।”- मल्लिकार्जुन खरगे
अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर भी साधा निशाना
खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिकी दबाव में काम करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील करके देश के किसानों के हितों का बलिदान कर दिया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जो ट्रंप कहते हैं, मोदी वही करते हैं। इन्होंने अपने घुटने टेक दिए हैं।”
कांग्रेस पार्टी ने भी अपने एक पोस्ट में कहा, “नेता विपक्ष राहुल गांधी करोड़ों भारतीयों की आवाज हैं लेकिन सदन में उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। ये संसद का अपमान है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।” पार्टी के अनुसार, सरकार का यह लोकतंत्र विरोधी रवैया है जिसका विपक्ष पुरजोर विरोध करता है। विपक्ष का कहना था कि अगर राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने दिया जाता तो वे प्रधानमंत्री का भाषण जरूर सुनते।





