दिल्ली में बीते शुक्रवार को हुई भारी बारिश के कारण निजामुद्दीन इलाके में स्थित एक पुरानी दरगाह की दीवार और छत ढह गई। यह दर्दनाक हादसा दोपहर करीब 3:55 बजे हुआ। मलबे में दबने से तीन महिलाओं समेत छह लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हुए हैं।
पुलिस और राहत टीम ने मौके पर पहुंचकर तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर और एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि दरगाह शरीफ पत्ते वाली की दीवार और छत लगभग 50 साल पुरानी थी और बारिश के चलते कमजोर होकर ढह गई।
हुमायूं के मकबरे को लेकर फैली अफवाह
हादसे के बाद सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह अफवाह फैल गई कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हुमायूं के मकबरे का एक गुंबद ढह गया है। इससे लोगों में चिंता फैल गई।
हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इस मामले में तुरंत सफाई दी। एएसआई ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि हुमायूं का मकबरा पूरी तरह से सुरक्षित है और इस इमारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
ASI ने जताया शोक, बताया स्मारक सुरक्षित
एएसआई ने अपने बयान में कहा, “हम दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में पट्टे वाली दरगाह में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण घटनास्थल की निकटता को देखते हुए जरूरत पड़ने पर सहायता देने को तैयार है।”
उन्होंने यह भी कहा कि हुमायूं का मकबरा, जो कि 16वीं सदी का एक महत्वपूर्ण स्मारक है, एकदम ठीक स्थिति में है और उससे जुड़ी सभी संरचनाएं सुरक्षित हैं। स्मारक 27.04 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जिसमें कई समकालीन इमारतें भी शामिल हैं।
पुरानी और असुरक्षित संरचनाओं पर ध्यान देने की जरूरत
इस हादसे ने एक बार फिर दिखाया कि राजधानी जैसे शहर में भी कई पुरानी और असुरक्षित इमारतें अब भी मौजूद हैं, जिन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो और भी जानलेवा घटनाएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी पुरानी धार्मिक या ऐतिहासिक संरचनाओं का समय-समय पर निरीक्षण और मरम्मत जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकें। सरकार और स्थानीय निकायों को चाहिए कि वे असुरक्षित इमारतों की सूची बनाएं और उन्हें सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया तेज करें।





