दिल्ली की राजनीति में एक नया टकराव उस समय सामने आया जब आम आदमी पार्टी ने विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने अरविंद केजरीवाल की पेशी को लाइव दिखाने की खुली चुनौती दे दी। पार्टी की ओर से कहा गया कि यदि BJP सरकार पारदर्शिता का दावा करती है, तो शुक्रवार को होने वाली पूरी कार्यवाही का प्रसारण करे।
“अगर BJP सरकार में हिम्मत है तो शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल की पेशी की पूरी कार्यवाही लाइव स्ट्रीमिंग करे। तब दिल्लीवालों के सामने साफ हो जाएगा कि सरकार जनहित के मुद्दों पर काम कर रही है या केवल राजनीतिक आरोपों में उलझी है।”- आतिशी
पार्टी मुख्यालय में विधायक संजीव झा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि विशेषाधिकार समिति ने केजरीवाल को उस विवाद पर समन किया है जिसमें पूछा जा रहा है कि दिल्ली विधानसभा परिसर में ब्रिटिश काल में कथित फांसी घर था या नहीं। इसी सवाल को लेकर AAP ने BJP पर पलटवार किया है और कहा है कि मुद्दे की सुनवाई जनता के सामने होनी चाहिए।
फांसी घर विवाद पर क्या कह रही है AAP
आतिशी ने प्रेस वार्ता में कहा कि जब AAP सरकार के दौरान विधानसभा भवन के बंद कमरों को खोलकर रेनोवेशन कराया गया था, तब एक ऐसे हिस्से का पता चला था जहां सुरंगनुमा पीछे का रास्ता, रस्सियां, कांच की गोलियां, पुराने जूते और कपड़े जैसी चीजें मिली थीं। उनके मुताबिक, बाद में ब्रिटिश भारत काल के दस्तावेजों से मिलान के आधार पर यह समझ बनी कि उस दौर में परिसर में मजिस्ट्रेट अदालत जैसी व्यवस्था थी और कैदियों को कुछ समय तक वहां रखा जाता था।
उन्होंने दावा किया कि बरामद सामग्री और ढांचे के आधार पर उस जगह को ब्रिटिश दौर की गुप्त दमन व्यवस्था से जोड़कर देखा गया। आतिशी के अनुसार, अंग्रेजों ने स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ कई कार्रवाइयां औपचारिक रिकॉर्ड से बाहर भी की थीं, इसलिए केवल उपलब्ध कागजी रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष सीमित नहीं होना चाहिए।
AAP सरकार के समय लिया गया फैसला
आतिशी ने कहा कि उस समय विधानसभा में यह निर्णय लिया गया था कि उस स्थान को लोगों के लिए खोला जाएगा ताकि नागरिक औपनिवेशिक शासन के तौर-तरीकों को समझ सकें। उनके बयान के अनुसार, इस स्थान का सार्वजनिक उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, तत्कालीन स्पीकर रामनिवास गोयल और डिप्टी स्पीकर राखी बिड़लान ने किया था।
AAP का तर्क है कि जिस जगह के बारे में पहले यह कदम उठाए गए, अब उसी को लेकर BJP सरकार अलग रुख ले रही है। आतिशी ने कहा कि मौजूदा सरकार की ओर से यह कहा जा रहा है कि वहां फांसी घर नहीं था, जबकि AAP इसे ऐतिहासिक संदर्भ से जुड़ा मामला बता रही है।
BJP पर प्राथमिकताओं को लेकर हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतिशी ने BJP पर आरोप लगाया कि सरकार विधानसभा और प्रशासनिक संसाधन उन मुद्दों पर लगा रही है जिनका तत्काल नागरिक समस्याओं से सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पानी, प्रदूषण, सड़क और निजी स्कूल फीस जैसे मसले लोगों को प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक ऊर्जा किसी और दिशा में जा रही है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर केजरीवाल के बतौर मुख्यमंत्री किए गए उद्घाटनों को आधार बनाकर पूछताछ की परंपरा शुरू की जाती है, तो क्या अब पिछले 10 साल की हर परियोजना पर इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री को बुलाया जाएगा। उनके मुताबिक, जनता ने सरकार को रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज और बुनियादी सेवाओं में सुधार के लिए चुना है।
आतिशी ने दावा किया कि बीते एक साल में प्रदूषण की स्थिति गंभीर रही है और कई इलाकों में गंदे पानी की शिकायतें भी सामने आई हैं। AAP ने कहा कि इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की जगह राजनीतिक बहस को बढ़ाया जा रहा है।
फिलहाल, विशेषाधिकार समिति के समन, फांसी घर विवाद और लाइव स्ट्रीमिंग की मांग तीनों ने मिलकर दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही को एक बड़े राजनीतिक प्रश्न में बदल दिया है। शुक्रवार की सुनवाई को अब सिर्फ एक प्रक्रियात्मक पेशी नहीं, बल्कि पारदर्शिता बनाम राजनीतिक टकराव के टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है।






