तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (RTC) ने शहरी सार्वजनिक परिवहन में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है। निगम ने 2,000 इलेक्ट्रिक बसों की आपूर्ति के लिए ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक-ईवी ट्रांस और ग्रीनसेल मोबिलिटी के साथ अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होते ही दोनों कंपनियां निर्माण कार्य शुरू करेंगी, और उपलब्धता का लक्ष्य इस साल के अंत से अगले साल अगस्त तक रखा गया है।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र सरकार पीएम ई-ड्राइव के तहत राज्यों को इलेक्ट्रिक बसें दे रही है। हाल ही में इसी योजना में तेलंगाना को 2,000 बसों की मंजूरी मिली है। अब राज्य स्तर पर आपूर्ति, फ्लीट कॉन्फिगरेशन और संचालन से जुड़े फैसले तेज किए जा रहे हैं।
किन कंपनियों को कितना काम मिला
केंद्रीय स्तर पर जारी टेंडर के अनुसार ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक-ईवी ट्रांस को 1,025 लो-फ्लोर नॉन-एसी और 60 लो-फ्लोर एसी बसों का काम दिया गया है। दूसरी ओर, ग्रीनसेल मोबिलिटी को 915 स्टैंडर्ड फ्लोर बसों के निर्माण का टेंडर मिला है। कुल संख्या 2,000 बसों की है, जिसे राज्य के शहरी रूट नेटवर्क के लिए चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा।
RTC अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही अनुबंध से जुड़ी शेष औपचारिकताएं पूरी होंगी, निर्माण लाइन सक्रिय हो जाएगी। इस समय फोकस केवल बसें खरीदने पर नहीं, बल्कि समयबद्ध तैनाती पर भी है, ताकि नई बसें डिपो और रूट योजना के साथ सीधे सेवा में लाई जा सकें।
लो-फ्लोर बनाम स्टैंडर्ड फ्लोर पर नया सवाल
फ्लीट मिश्रण को लेकर एक नीति-स्तर का सवाल भी सामने आया है। RTC का आकलन है कि शहर के कई हिस्सों में स्पीड ब्रेकर अधिक होने के कारण कुछ रूटों पर स्टैंडर्ड फ्लोर बसें संचालन के लिहाज से अधिक सुविधाजनक रह सकती हैं।
इसी बीच केंद्रीय परिवहन विभाग ने हाल में एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें कहा गया कि शहरों में चलने वाली सभी बसें लो-फ्लोर होनी चाहिए। इस निर्देश के बाद तेलंगाना RTC ने केंद्र को पत्र लिखकर स्पष्टता मांगी है कि पहले से स्वीकृत बस कॉन्फिगरेशन और नई आपूर्ति के बीच अंतिम अनुपालन मॉडल क्या रहेगा। मौजूदा संकेत यही हैं कि राज्य परिवहन निगम बस आपूर्ति को केंद्र के अंतिम निर्णय के अनुरूप समायोजित करना चाहता है।
चार्जिंग ढांचे पर भी समानांतर तैयारी
इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारने के साथ सबसे बड़ी जरूरत चार्जिंग नेटवर्क की होती है, और RTC ने इस हिस्से पर अलग से तैयारी शुरू कर दी है। योजना के तहत शहर के 19 मौजूदा डिपो और 10 प्रस्तावित नए डिपो में एचटी कनेक्शन स्थापित किए जाएंगे। इससे डिपो-आधारित चार्जिंग क्षमता बढ़ेगी और फ्लीट प्रबंधन व्यवस्थित किया जा सकेगा।
सिर्फ डिपो चार्जिंग पर निर्भरता कम करने के लिए हैदराबाद में 10 विशेष चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य यह है कि बसों को बार-बार डिपो लौटना न पड़े और संचालन के दौरान ही चार्जिंग विकल्प उपलब्ध हों। इन स्टेशनों के लिए सरकारी भूमि आवंटन का अनुरोध भी किया गया है, ताकि रूट-आधारित चार्जिंग मॉडल पर तेजी से काम शुरू किया जा सके।
कुल मिलाकर, तेलंगाना में इलेक्ट्रिक बसों का यह चरण केवल खरीद का कार्यक्रम नहीं है; इसमें टेंडर आवंटन, तकनीकी विनिर्देश, केंद्रीय दिशा-निर्देशों का अनुपालन और चार्जिंग अवसंरचना चारों स्तर पर एक साथ फैसले लिए जा रहे हैं। अब नजर इस पर रहेगी कि लो-फ्लोर मानक पर केंद्र की अंतिम स्पष्टता कब आती है और उसके बाद 2,000 बसों की तैनाती का कैलेंडर किस क्रम में लागू होता है।






