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दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी ने विधानसभा स्पीकर को लिखा पत्र, पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का लगाया गंभीर आरोप, जानें पूरा मामला

Written by:Ankita Chourdia
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आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर निष्कासित विपक्षी विधायकों को सदन में वापस बुलाने की मांग की है। उन्होंने अध्यक्ष के फैसले को अलोकतांत्रिक बताते हुए उन पर सत्ता पक्ष के प्रति नरम और विपक्ष के प्रति कठोर रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी ने विधानसभा स्पीकर को लिखा पत्र, पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का लगाया गंभीर आरोप, जानें पूरा मामला

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के हालिया सत्र में विपक्षी विधायकों के निष्कासन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने रविवार को विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने निष्कासित किए गए सभी सदस्यों को सदन की कार्यवाही में फिर से शामिल करने की मांग की है।

आतिशी ने अपने पत्र में अध्यक्ष को याद दिलाया कि आठवीं विधानसभा के गठन के बाद पक्ष और विपक्ष ने सर्वसम्मति से उन्हें चुना था। इसके पीछे उम्मीद थी कि उनके अनुभव से सदन की कार्यवाही लोकतांत्रिक और विधि-सम्मत तरीके से चलेगी। लेकिन हालिया घटनाओं ने इस उम्मीद को तोड़ा है।

अलोकतांत्रिक और मर्यादा के विरुद्ध कदम

नेता प्रतिपक्ष ने विधायकों के निष्कासन को एक ऐसी नई परंपरा की शुरुआत बताया है, जो न केवल अलोकतांत्रिक है बल्कि विधानसभा की मर्यादा को भी तार-तार करती है। उन्होंने कहा कि एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को पूरे सत्र के लिए सदन परिसर में आने से रोकना अत्यंत निंदनीय और अनुचित है।

“यह एक चुने हुए जनप्रतिनिधि के विशेषाधिकारों का हनन भी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधानसभा केवल सरकार का मंच नहीं होता, बल्कि यह पक्ष व विपक्ष दोनों की सहभागिता से संचालित होने वाला एक सशक्त संस्थान है।”- आतिशी, नेता प्रतिपक्ष

सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए अलग-अलग मापदंड?

आतिशी ने अध्यक्ष के फैसले पर पक्षपात का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाल ही में संपन्न सत्र के दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने लगातार तीन दिनों तक सदन को नहीं चलने दिया, जिससे दिल्ली से जुड़े कई गंभीर विषयों पर चर्चा नहीं हो सकी। इसके बावजूद अध्यक्ष ने एक भी सत्ताधारी सदस्य पर कोई कार्रवाई नहीं की।

इसके विपरीत, जब विपक्ष के सदस्यों ने कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उठाने का प्रयास किया, तो उन्हें न केवल सदन से, बल्कि पूरे परिसर से बाहर कर दिया गया। यह निर्णय उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रयोग में बाधा डालने जैसा है।

समितियों की बैठकों में भी शामिल होने से रोका गया

पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि निष्कासन के दौरान सदस्यों को पूर्व-निर्धारित समितियों की बैठकों में भी हिस्सा नहीं लेने दिया गया और उन्हें विधानसभा के द्वार पर ही रोक दिया गया। आतिशी के अनुसार, यह स्पष्ट रूप से उनके विधायी कार्यों के निष्पादन को बाधित करने का प्रयास था, जो एक तरह से संविधान का भी अनादर है।

आतिशी ने सभी विपक्षी विधायकों की ओर से आग्रह किया कि निष्कासित किए गए माननीय विधायकों को सत्र की अगली बैठक में सम्मिलित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सदन निष्पक्ष रूप से संचालित हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि अध्यक्ष इन सभी विषयों का संज्ञान लेकर विधायी परंपराओं के अनुरूप सदन का संचालन सुनिश्चित करेंगे।

Ankita Chourdia
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