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मिडिल ईस्ट संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी की उच्चस्तरीय बैठक, खाद्य-उर्वरक और ईंधन की सप्लाई पर हुआ मंथन

Written by:Ankita Chourdia
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान-इजरायल संघर्ष की पृष्ठभूमि में सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (CCS) की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में भारत पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा की गई और आवश्यक वस्तुओं, विशेष रूप से खाद्य, ईंधन और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रणनीति पर चर्चा हुई।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी की उच्चस्तरीय बैठक, खाद्य-उर्वरक और ईंधन  की सप्लाई पर हुआ मंथन

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की इस बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक संकट का भारत पर पड़ने वाले असर का आकलन करना और इससे निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करना था।

बैठक में इस बात पर गहन चर्चा हुई कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला को कैसे मजबूत रखा जाए। कैबिनेट सचिव ने मौजूदा हालात और विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। इसमें अल्पकालिक, मध्यम-अवधि और दीर्घकालिक उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

आपूर्ति श्रृंखला और महंगाई रोकने पर जोर

सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का असर आम नागरिकों पर कम से-कम पड़े। बैठक में खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा की विस्तृत समीक्षा की गई। इस बात पर जोर दिया गया कि देश में जरूरी चीजों की कोई कमी न हो। इसके लिए रसायन, औषधि और पेट्रोकेमिकल जैसे क्षेत्रों के लिए आयात के वैकल्पिक स्रोतों को तलाशने पर भी चर्चा हुई। साथ ही, भारतीय वस्तुओं के निर्यात के लिए नए बाजार विकसित करने की योजना पर भी विचार किया गया ताकि व्यापार संतुलन बना रहे।

किसानों और ऊर्जा सुरक्षा की चिंता

आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा था। बैठक में इस बात का आकलन किया गया कि मौजूदा संकट का उर्वरक आपूर्ति पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में बनाए गए पर्याप्त बफर स्टॉक के कारण फिलहाल कोई कमी नहीं है, लेकिन भविष्य के लिए उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी काम करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित किया गया कि सभी बिजली संयंत्रों के पास पर्याप्त कोयले का भंडार है, जिससे देश में बिजली की कोई कमी नहीं होगी।

कालाबाजारी रोकने के सख्त निर्देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में साफ निर्देश दिए कि यह एक गतिशील स्थिति है और सरकार के सभी अंगों को मिलकर काम करना होगा ताकि नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो। उन्होंने राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय स्थापित करने पर बल दिया।

पीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा, “यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए कि इस संघर्ष का नागरिकों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।”

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