Hindi News

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों में SLFRC गठन के सरकारी आदेश पर लगाई रोक, फीस को लेकर दिया यह निर्देश

Written by:Gaurav Sharma
Published:
Last Updated:
दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को स्कूल स्तरीय फीस विनियमन समिति (SLFRC) बनाने के दिल्ली सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्कूल वही फीस वसूलेंगे जो 2025-26 में ली गई थी। इस मामले में अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों में SLFRC गठन के सरकारी आदेश पर लगाई रोक, फीस को लेकर दिया यह निर्देश

नई दिल्ली: दिल्ली के निजी स्कूलों में फीस निर्धारण को लेकर दिल्ली सरकार और स्कूल संघों के बीच चल रहे विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम अंतरिम फैसला सुनाया है। शनिवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली सरकार की उस अधिसूचना के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसमें निजी स्कूलों को स्कूल स्तरीय फीस विनियमन समिति (SLFRC) का गठन करने का निर्देश दिया गया था।

यह फैसला निजी स्कूलों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई तक स्कूलों को ऐसी कोई भी समिति बनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। कोर्ट इस मामले पर अब 12 मार्च को आगे की सुनवाई करेगा।

अदालत ने फीस को लेकर दिया यह निर्देश

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि निजी स्कूल शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए वही फीस वसूलने के हकदार होंगे, जो उन्होंने पिछले शैक्षणिक वर्ष यानी 2025-26 में वसूली थी। बेंच ने कहा कि याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान SLFRC का गठन स्थगित रहेगा। अदालत ने यह भी जोड़ा कि किसी भी तरह की अत्यधिक फीस को कानून के अनुसार विनियमित किया जाएगा, लेकिन फिलहाल स्कूलों पर समिति गठन का दबाव नहीं होगा।

क्यों अदालत पहुंचे थे स्कूल?

यह मामला दिल्ली सरकार द्वारा 1 फरवरी को जारी एक अधिसूचना से जुड़ा है। इस अधिसूचना में सभी निजी स्कूलों को 10 दिनों के भीतर SLFRC का गठन करने का आदेश दिया गया था। इसी आदेश को कई स्कूल संघों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाओं में इस अधिसूचना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

मामले पर गरमाई सियासत, AAP ने साधा निशाना

हाईकोर्ट के इस फैसले पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आप नेता और दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि यह फैसला स्कूल मालिकों के पक्ष में है।

“प्राइवेट स्कूल के मालिकों और बीजेपी की दिल्ली सरकार के बीच सांठगांठ आज हाईकोर्ट में फिर से उजागर हो गई। इससे पहले बीजेपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आश्वासन दिया था कि उनका “प्राइवेट फीस एक्ट” 2025-26 के लिए बढ़ाई गई प्राइवेट स्कूल फीस पर लागू नहीं होगा। अब हाई कोर्ट में, इस एक्ट को आगामी सत्र 2026-27 के लिए भी लागू कर दिया गया है।”- सौरभ भारद्वाज, AAP नेता

भारद्वाज ने आगे कहा कि इस फैसले का मतलब है कि अप्रैल 2025 में बढ़ाई गई अत्यधिक फीस वापस नहीं होगी और मध्यम वर्ग के अभिभावकों को बढ़ी हुई फीस चुकानी पड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून पूरी तरह से गुप्त रूप से और अभिभावकों से कोई राय लिए बिना बनाया गया था।

मध्य प्रदेश से जुड़ी विश्वसनीय और ताज़ा खबरें MP Breaking News in Hindi यहां आपको मिलती है MP News के साथ साथ लगातार अपडेट, राजनीति, अपराध, मौसम और स्थानीय घटनाओं की सटीक जानकारी। भरोसेमंद खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें और अपडेटेड रहें !
Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
Follow Us :GoogleNews