डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह बलात्कार और हत्या के मामलों में दोषी हैं। उन्हें मंगलवार सुबह रोहतक के सुनारिया जेल से 40 दिन की पैरोल मिलने के बाद रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद वह अपने काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हो गए। डेरा के प्रवक्ता और वकील जितेंद्र खुराना ने बताया कि राम रहीम पैरोल अवधि के दौरान सिरसा मुख्यालय में रहेंगे।

यह राम रहीम की 2020 के बाद से 14वीं अस्थायी रिहाई है। इस साल अप्रैल में उन्हें 21 दिन की फरलो दी गई थी। अब तक वह कुल 326 दिन जेल से बाहर रह चुके हैं। 15 अगस्त को 58 वर्ष के होने वाले राम रहीम को 2017 में अपने दो शिष्यों के साथ बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था।

पत्रकार की 16 साल पहले हुई हत्या

इसके अलावा, 2019 में राम रहीम और अन्य को एक पत्रकार की 16 साल पहले हुई हत्या के मामले में भी दोषी करार दिया गया था। उनकी इस पैरोल के समाप्त होने तक, वह इस साल कुल तीन महीने जेल से बाहर रह चुके होंगे। राम रहीम की बार-बार पैरोल और फरलो को लेकर विवाद भी रहा है, क्योंकि उनके समर्थकों और आलोचकों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस होती रही है। उनकी रिहाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई है।

बलात्कार मामले में 20 साल की सजा

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 2017 में दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा, 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या और डेरा मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या के लिए भी उन्हें उम्रकैद की सजा मिली। हालांकि, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 2024 में रंजीत सिंह हत्याकांड में उन्हें बरी कर दिया। राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो मिलने पर विवाद उठा है, जिसमें हरियाणा सरकार पर विशेष छूट देने के आरोप लगे हैं।