राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस से गठबंधन समाप्त होने के संकेत देते हुए द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने लोकसभा में अपने सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। डीएमके की वरिष्ठ नेता और सांसद कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष को इस संबंध में एक पत्र लिखा है। इस पत्र ने स्पष्ट कर दिया है कि डीएमके और कांग्रेस के बीच का गठबंधन अब राष्ट्रीय स्तर पर समाप्त हो चुका है। यह घटनाक्रम इंडिया गठबंधन से डीएमके के अलग होने का भी स्पष्ट इशारा माना जा रहा है।
कनिमोझी ने सात मई को लिखे अपने पत्र में “बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों” का स्पष्ट रूप से हवाला दिया है। उन्होंने बताया कि चूंकि कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन अब समाप्त हो गया है, ऐसे में डीएमके सांसदों का सदन में कांग्रेस सदस्यों के साथ बैठना उचित नहीं होगा। इस राजनीतिक बदलाव का मूल कारण कांग्रेस का तमिलनाडु में अभिनेता विजय को समर्थन देने का निर्णय था। कांग्रेस ने यह भी घोषणा की थी कि वह आगामी सभी चुनाव विजय की पार्टी टीवीके के साथ गठबंधन में लड़ेगी। इस निर्णय के बाद से ही दोनों दलों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर संबंधों में दरार आ गई थी।
DMK-कांग्रेस का गठबंधन समाप्त
अपने पत्र में कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध करते हुए लिखा है कि, “हमारा गठबंधन अब समाप्त हो चुका है। इसलिए हमारे सदस्यों के लिए वर्तमान बैठने की व्यवस्था को जारी रखना अनुपयुक्त होगा। मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि डीएमके संसदीय दल के सदस्यों के लिए संसद में अलग से बैठने की व्यवस्था की जाए।” यह उल्लेखनीय है कि डीएमके और कांग्रेस लंबे समय से केंद्र और तमिलनाडु की राजनीति में एक-दूसरे के मजबूत सहयोगी रहे हैं। उनके बीच यह अलगाव भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
इस अलगाव का असर न केवल संसद के भीतर के समीकरणों पर पड़ेगा, बल्कि आगामी चुनावों और क्षेत्रीय राजनीति पर भी इसके गहरे परिणाम होने की संभावना है। लोकसभा अध्यक्ष को लिखे गए इस पत्र से यह स्पष्ट है कि डीएमके अब सदन में अपनी एक स्वतंत्र पहचान बनाए रखना चाहती है। पार्टी का मानना है कि अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के लिए यह आवश्यक है कि वह एक स्वतंत्र गुट के रूप में कार्य करे।
अब नजरें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं। यदि इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया जाता है तो सदन का ‘सीटिंग चार्ट’ बदला जाएगा और डीएमके विपक्षी खेमे में एक स्वतंत्र गुट के रूप में नजर आएगी। इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता के भविष्य पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। डीएमके के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं, जो कि संसद में एक महत्वपूर्ण संख्या है। डीएमके का इंडिया गठबंधन से अलग होने का यह फैसला इस गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इसका असर कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर मतदान पर भी पड़ सकता है, क्योंकि गठबंधन की ताकत अब कम हो जाएगी।






