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DRDO और ISRO को मिली बड़ी सफलता, गगनयान मिशन के ड्रोग पैराशूट का सफल परीक्षण, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई

Written by:Gaurav Sharma
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भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' ने एक बड़ी बाधा पार कर ली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने मिलकर चंडीगढ़ में मिशन के ड्रोग पैराशूट का सफल भार परीक्षण पूरा किया, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
DRDO और ISRO को मिली बड़ी सफलता, गगनयान मिशन के ड्रोग पैराशूट का सफल परीक्षण, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई

नई दिल्ली: भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ मिलकर गगनयान के ड्रोग पैराशूट का सफलतापूर्वक योग्यता परीक्षण पूरा कर लिया है। यह परीक्षण अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने वाले सिस्टम की मजबूती को प्रमाणित करता है।

यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी बड़ी मजबूती देती है, क्योंकि यह उच्च शक्ति वाले पैराशूट के डिजाइन और निर्माण में भारत की स्वदेशी विशेषज्ञता को साबित करती है।

कैसे और कहाँ हुआ यह महत्वपूर्ण परीक्षण?

यह जटिल परीक्षण बुधवार को चंडीगढ़ स्थित DRDO की टर्मिनल बैलिस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला (TBRL) में किया गया। इसके लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई ‘रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज’ सुविधा का इस्तेमाल हुआ। यह एक अनूठी गतिशील परीक्षण सुविधा है, जिसका उपयोग उच्च गति पर एयरोडायनमिक और बैलिस्टिक मूल्यांकन के लिए किया जाता है।

परीक्षण के दौरान, पैराशूट पर वास्तविक उड़ान के दौरान लगने वाले अधिकतम भार से भी अधिक भार डाला गया। इस गतिशील परीक्षण ने पैराशूट के डिजाइन में रखे गए अतिरिक्त सुरक्षा मार्जिन को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया। इस सफल परीक्षण में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC), एरियल डिलीवरी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (ADRDE) और TBRL की समर्पित टीमों ने मिलकर काम किया।

क्यों खास है यह परीक्षण?

गगनयान मिशन में ड्रोग पैराशूट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह अंतरिक्ष कैप्सूल के पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करने के बाद उसकी गति को स्थिर करने और कम करने के लिए तैनात किए जाने वाले पैराशूट सिस्टम का एक प्रमुख हिस्सा है। इसकी सफलता अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए सर्वोपरि है।

यह परीक्षण एक बार फिर TBRL की उन्नत परीक्षण सुविधाओं और तकनीकी विशेषज्ञता को रेखांकित करता है, जो देश के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रमों में लगातार योगदान दे रही है।

“यह परीक्षण आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।”- राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए DRDO, ISRO और संबंधित उद्योग जगत को बधाई दी। वहीं, DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस उपलब्धि के लिए परीक्षण से जुड़ी सभी टीमों की सराहना की।

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