जब बात देश की सुरक्षा और उसके गौरव की आती है, तो भारत का हर नागरिक सीना चौड़ा कर लेता है, और अब एक ऐसी खबर आई है जो इस गौरव को और बढ़ा देगी। रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और विश्व गुरु बनने की दिशा में भारत ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अपनी अथक मेहनत और लगन से हाइपरसोनिक मिसाइल के विकास में आ रही एक बड़ी चुनौती को सफलतापूर्वक भेद दिया है। यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की बढ़ती हुई सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भरता का जीता-जागता प्रमाण है।
20 मिनट तक लगातार इंजन संचालन
डीआरडीओ की अपनी प्रतिष्ठित प्रयोगशाला, रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL), ने ‘एक्टिवली कूल्ड फुल स्केल स्क्रैमजेट कंबस्टर’ का एक अभूतपूर्व और लंबी अवधि का सफल परीक्षण कर पूरे देश को गर्व से भर दिया है। यह परीक्षण हैदराबाद स्थित अत्याधुनिक ‘स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट’ (SCPT) फैसिलिटी में 9 मई, 2026 को किया गया, जिसने वैज्ञानिकों की कठोर तपस्या और तकनीकी कौशल का लोहा मनवाया। इस दौरान इंजन को लगातार 1,200 सेकंड यानी पूरे 20 मिनट से भी अधिक समय तक चलाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। याद रहे, इसी साल जनवरी में भी 700 सेकंड का सफल परीक्षण हुआ था, लेकिन इस बार की यह लंबी अवधि भारत की उन्नत एयरोस्पेस क्षमताओं की बेजोड़ मिसाल पेश करती है। यह दिखाता है कि हमारे वैज्ञानिक किस तरह से असंभव को संभव बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत हैं।
यह स्क्रैमजेट इंजन आखिर है क्या, और क्यों यह भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण है? इसकी खासियतें सुनकर हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाएगा।
सुपरसोनिक रफ्तार का बादशाह: यह इंजन हवा में मौजूद ऑक्सीजन का कुशलता से उपयोग कर मिसाइल को ध्वनि की गति से कई गुना अधिक तेज, यानी हाइपरसोनिक रफ्तार से उड़ने में सक्षम बनाता है। सोचिए, जब हमारी मिसाइलें दुश्मन के पास पलक झपकते ही पहुंच जाएंगी तो उनका क्या हश्र होगा। यह गति न केवल दुश्मन को प्रतिक्रिया का समय नहीं देगी, बल्कि हमारी रक्षा प्रणाली को एक अभूतपूर्व बढ़त भी दिलाएगी।
शुद्ध स्वदेशी शक्ति: इस तकनीक में भारत में ही विकसित लिक्विड हाइड्रोकार्बन एंडोथर्मिक फ्यूल का इस्तेमाल किया गया है। यह दर्शाता है कि भारत न केवल विश्वस्तरीय तकनीक बना सकता है, बल्कि उसे पूरी तरह अपने दम पर विकसित भी कर सकता है। यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अभेद्य सुरक्षा कवच: अत्यधिक गर्मी किसी भी इंजन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। लेकिन हमारे वैज्ञानिकों ने इसमें हाई-टेंपरेचर थर्मल बैरियर कोटिंग और एडवांस कूलिंग सिस्टम लगाकर इंजन को पिघलने से बचा लिया है, मानो उसे एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान किया हो। यह इंजीनियरिंग का एक ऐसा चमत्कार है जो हमारी तकनीकी श्रेष्ठता को सिद्ध करता है।
इस सफल ग्राउंड-टेस्ट ने केवल इंजन के डिजाइन की उत्कृष्टता को ही साबित नहीं किया, बल्कि भारत की विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं की ताकत का भी परचम लहराया है। इस अद्वितीय तकनीक के साथ भारत अब उन चुनिंदा और शक्तिशाली देशों की कतार में शान से खड़ा हो गया है, जिनके पास हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने की अद्भुत क्षमता है। यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद का प्रमाण है, जो दुनिया को यह संदेश देता है कि भारत अब किसी से पीछे नहीं है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई
देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अप्रतिम सफलता पर डीआरडीओ के जांबाज वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के सहयोगियों को हृदय से बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के महत्वाकांक्षी ‘हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम’ के लिए एक अत्यंत मजबूत नींव रखेगी, जो भविष्य में भारत को अजेय बनाएगी। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी टीम की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे भविष्य के युद्ध कौशल की दिशा में एक क्रांतिकारी और निर्णायक कदम बताया। यह सिद्ध करता है कि भारत अब केवल रक्षा करने वाला नहीं, बल्कि रक्षा में नवाचार करने वाला अग्रणी राष्ट्र बन चुका है और अपनी सुरक्षा के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहेगा।
DRDL Hyderabad has conducted second successful extensive long-duration test of Actively Cooled Full Scale Scramjet Combustor, achieving a run time of over 1200 seconds at its state-of-the-art Scramjet Connect Pipe Test (SCPT) Facility on May 09, 2026. This is major advancement… pic.twitter.com/btMU473E8n
— DRDO (@DRDO_India) May 9, 2026






